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Ghulam Nabi Azad [Hindi] | कांग्रेस ऐसी स्थिति में पहुंच गई, जहां उभर पाना मुस्किल : गुलाम नबी आजाद

Ghulam Nabi Azad [Hindi] कांग्रेस ऐसी स्थिति में पहुंच गई, जहां उभर पाना मुस्किल गुलाम नबी आजाद
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Ghulam Nabi Azad Resignation Letter [Hindi] | सीनियर नेता ने कहा कि वह ‘भारी मन’ से यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज तक पार्टी में किसी भी स्तर पर चुनाव नहीं हुए। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से पहले ‘कांग्रेस जोड़ो यात्रा’ निकाली जानी चाहिए थी। गुलाम नबी आजाद पिछले काफी वक्त से पार्टी से नाराज चल रहे थे। कांग्रेस के बागी गुट जी-23 के अहम सदस्य आजाद ने सोनिया गांधी को कांग्रेस में बदलाव को लेकर एक चिट्ठी भी लिखी थी। इस चिट्ठी के बाद काफी बवाल मचा था।

पहले ‘कांग्रेस जोड़ो यात्रा’ निकालने की जरूरत: आजाद

सीनियर नेता ने कहा कि वह ‘भारी मन’ से यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से पहले ‘कांग्रेस जोड़ो यात्रा’ निकाली जानी चाहिए थी। आजाद ने कहा कि पार्टी में किसी भी स्तर पर चुनाव संपन्न नहीं हुए।

यह इस्तीफा कांग्रेस के लिए बड़ा झटका: उमर अब्दुल्ला

Ghulam Nabi Azad [Hindi]| वहीं, नेशनल कांफ्रेंस (NC) के नेता उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस से गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे को पार्टी के लिए बड़ा झटका बताया है। उन्होंने कहा एक इतनी पुरानी पार्टी का पतन देखना ‘दुखद’ और ‘खौफनाक’ है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘लंबे समय से ऐसी अटकलें थीं… कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा झटका है। शायद हाल के दिनों में पार्टी छोड़ने वाले वह सबसे वरिष्ठ नेता हैं, उनका इस्तीफा बेहद दुखद है। इतनी पुरानी पार्टी का पतन होते देखना दुखद और खौफनाक है।’

Ghulam Nabi Azad [Hindi] | रिमोट कंट्रोल मॉडल का लगाया आरोप

गुलाम नबी आजाद ने इस्तीफा पत्र में लिखा, ”2014 में आपके और उसके बाद राहुल गांधी द्वारा नेतृत्व संभाले जाने के बाद, कांग्रेस अपमानजनक ढंग से दो लोकसभा चुनाव हार गई. 2014 से 2022 के बीच 49 विधानसभा के चुनावों में से कांग्रेस 39 में हार गई. पार्टी केवल चार राज्यों के चुनाव जीत पाई और छह में वह गठबंधन की स्थिति बना पाई. दुर्भाग्यवश, आज कांग्रेस केवल दो राज्यों में सरकार चला रही है और दो अन्य राज्यों में यह बहुत सीमांत गठबंधन सहयोगियों में है.”

सोनिया को लेकर मीठे-मीठे बोल लेकिन इशारों में हमला भी

खास बात ये है कि आजाद ने अपने इस्तीफे में कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी के कामकाज की तारीफ तो की है लेकिन इशारों में उन पर भी हमला बोला है। उन्होंने याद किया कि किस तरह सीताराम केसरी को हटाकर सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनी। अक्टूबर 1998 में पंचमढ़ी, 2003 में शिमला और जनवरी 2013 में जयपुर में कांग्रेस ने महामंथन किया। आजाद ने लिखा है कि 2013 के जयपुर महाधिवेशन में उन्होंने पार्टी में नई जान फूंकने के लिए जो सिफारिशें की, 2014 के चुनाव के लिए विस्तृत ऐक्शन प्लान बनाया उस पर पिछले 9 सालों में भी अमल नहीं किया गया। उन्होंने लिखा है, ‘मैं 2013 से ही लगातार आपको और तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी को उन सिफारिशों को लागू करने के लिए कहता रहा लेकिन लागू करना तो दूर उनपर गंभीरता से विचार तक करने की कोई कोशिश नहीं की गई।’

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आजाद के इर्द-गिर्द घूमती थी कश्मीर में कांग्रेस की राजनीति

दरअसल पिछले दो से ढाई दशकों में गुलाम नबी आजाद जम्मू कश्मीर में कांग्रेस पार्टी के झंडाबरदार थे। वे जम्मू कश्मीर के सीएम भी रहे। लेकिन पिछले कुछ समय से वे अपनी ही पार्टी में हाशिए पर रखे गए। राहुल गांधी के राजनीति में सक्रिय होते ही जिन वरिष्ठ कांग्रेसियों को दरकिनार किया जाने लगा, उनमें से एक गुलाम नबी आजाद भी थे। उन्होंने मौके बे मौके अपना विरोध भी पार्टी आलाकमान को जताया।

Ghulam Nabi Azad [Hindi] | जब पीएम मोदी ने की थी गुलाब नबी आजाद की तारीफ

पिछले साल फरवरी माह में जब गुलाम नबी आजाद की राज्यसभा से बिदाई हो रही थी, इस मौके पर उनके सम्मान में पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में उनके राजनीतिक कार्यकाल की प्रशंसा की थी। अपने भाषण में खुद पीएम मोदी भी कई बार भावुक हुए थे।  तब तो ये कयास राजनीति के गलियारों में लगाए जाने लगे थे कि वे कभी भी बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। लेकिन कांग्रेस के लिहाज से देखा जाए तो उन्होंने इन सभी कयासों को झुठला दिया और सच्चे कांग्रेसी की तरह पार्टी के लिए काम किया।

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हालांकि जिस तरह से वे कांग्रेस की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट पिछले कुछ वर्षों में दिख रहे थे, तभी से ये लगने लगा था कि वे कांग्रेस को छोड़ सकते हैं। क्योंकि खुद उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब वो कांग्रेस नहीं रह गई है, जो पहले हुआ करती थी। उन्होंने तो यह भी कह दिया कि ये कांग्रेस अब नहीं बदल सकती। इन बातों को कहने में ऐसे व्यक्ति को पीड़ा होती ही है, जिसने अपना लगभग पूरा जीवन पार्टी के लिए समर्पित कर दिया हो।

गांधी परिवार के करीबी हैं रहे Ghulam Nabi Azad

गुलाम नबी आजाद केवल कांग्रेस पार्टी के एक नेता ही नहीं थे. उनके आजादी के वक्त से चली आ रही कांग्रेस पार्टी और उसके अहम किरदारों से करीबी रिश्ते रहे हैं. गांधी परिवार से उनके घरेलू रिश्तों की बात की जाती है. हालांकि बाद में यही करीबी कांग्रेस दूरी बनाने लगे. वक्त के साथ पार्टी में आए बदलावों से वह कांग्रेस पार्टी के जी-23 के एक अहम नेता के तौर पर उभर कर सामने आए. वह कहते रहे कि पार्टी रिमोट से चल रही है और उन्हें ये पसंद नहीं था. आखिरकार इस बेहद करीबी ने कांग्रेस पार्टी से स्थाई दूरी बना ली है. कांग्रेस में ही नहीं देश की राजनीति में उनके अनुभव और कद का अंदाजा इसी से लग जाता है कि केवल जम्मू कश्मीर ही नहीं बल्कि देश के सभी राज्यों में उनका दखल रहा है. उनके अहमियत का अंदाजा इसी लगाया जा सकता है कि मोदी सरकार में 23 मार्च 2022 को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया.

गुलाम नबी आजाद के सियासी सफर पर एक नजर

  • 1980 में गुलाम नबी आजाद जम्मू कश्मीर राज्य की यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए.
  • 1980 महाराष्ट्र की वाशिम लोकसभा सीट से 1980 में चुनकर आने के बाद गुलाम नबी आजाद लोकसभा में दाखिल हुए
  • 1982 में गुलाम नबी आजाद लॉ मिनिस्ट्री में डिप्टी मिनिस्टर के पद पर चुने गए
  • 1984 में  वो आठवीं लोकसभा के लिए  में भी चुने गए
  • 1985-89 सूचना और प्रसारण मंत्रालय में केंद्रीय उप मंत्री
  • 1990 से 1996 तक आजाद राज्यसभा के सदस्य रहे
  • अप्रैल 2006 राज्य के इतिहास में सबसे अधिक मतों के साथ जम्मू और कश्मीर विधान सभा के लिए चुने गए.
  • 2008 भद्रवाह से जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए दोबारा से चुने गए. दया कृष्ण को 29936 वोटों के अंतर से शिक्सत दी.
  • 2008 में गुलाम नबी आजाद जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री बने
  • 2009 चौथे कार्यकाल के लिए राज्यसभा के लिए चुने गए. इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बनाए गए
  • 2014 राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे.
  • 2015 पांचवीं बार राज्यसभा के लिए फिर से चुने गए.
  • राज्य सभा में जून 2014-15 फरवरी और साल  अगस्त 2021 विपक्ष के नेता.
  • यूपीए-2 शासनकाल में इन्हे स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रभार दिया गया
  • नरसिम्हा राव की सरकार में गुलाम नबी आजाद संसदीय कार्य मंत्री और नागरिक उड्डयन मंत्री रहे थे.
  • कांग्रेस के रिबेल ग्रुप G-23 के सदस्य हैं.

जी 23′ समूह के प्रमुख सदस्य रहे हैं गुलाम नबी आजाद

राज्यसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद को चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाया गया है। उन्हें पीएसी में भी जगह दी गई है। आजाद कांग्रेस के ‘जी 23’ समूह के प्रमुख सदस्य रहे हैं। इन नई नियुक्तियों से यह प्रतीत होता है कि कांग्रेस अलाकमान और आजाद के बीच रिश्ते बेहतर हुए हैं। 

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