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God Vs Supreme God: ईश्वर और परमेश्वर में क्या अन्तर है?

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God Vs Supreme God in hindi
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God Vs Supreme God: हिंदू धर्म की प्रभुप्रेमी आत्माएं विभिन्न प्रकार की मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं का पालन करती हैं। हम अपनी पवित्र पुस्तकों पर शोध और अध्ययन करते रहे हैं, लेकिन फिर भी हम इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए कि हिंदू धर्म के अनुसार सर्वोच्च और सर्वशक्तिमान भगवान (God Vs Supreme God) कौन है? राम-कृष्ण,देवी-देवता या ब्रह्मा,विष्णु,महेश यह सभी देवी-देवता ईश्वर की तुलना में आते हैं यह हमें अपना किया कर्म ही देते हैं हमारे किये कर्मों में परिवर्तन नहीं कर सकते। 

God Vs Supreme God: तीनों देवता (Tridev) Shri Brahma, Vishnu, Shiva अविनाशी नहीं हैं

ब्रह्मलोक से लेकर ब्रह्मा,विष्णु,महेश आदि के लोकों और ये स्वयं भी जन्म मरण व प्रलय में ही हैं इसलिए ये अविनाशी नहीं हैं। जिसके फल स्वरुप इनके उपासक भी जन्म मरण में ही है जिनका प्रमाण गीताजी के अध्याय 8 के श्लोक 16   में तथा गीता अध्याय 9 के श्लोक 7 में है। 

देवी देवताओं व तीनों गुणों रजगुण ब्रह्मा (Rajogun Brahma), सतगुण विष्णु (Satgun Vishnu), तमगुण शिवजी (Tamgun Shiva) की पूजा करना तथा भूत पूजा पित्र पूजा (श्राद्ध निकालना) मूर्खों की साधना है। इन्हें को नर्क में डाला जाएगा जिसका प्रमाण (गीता जी अध्याय 7 के श्लोक न 12 से 15 तथा 20 से 23 में किया है) 

श्रीमद्भागवत गीता जी (Shrimadbhagavat Gita) के अनुसार ब्रह्मलोक में गए भी जन्मते-मरते है

 श्रीमद्भागवत गीता जी (Shrimadbhagvat Gita) के अनुसार ब्रह्मलोक में गए भी जन्मते-मरते है। गीता अध्याय 8 के श्लोक 16 में लिखा है कि “ब्रह्मलोक पर्यंत सभी लोक पुनरावृत्ति में हैं अर्थात जन्मते मरते हैं।” पूर्ण परमात्मा के अतिरिक्त सभी देवी देवता, ब्रह्मा,विष्णु,महेश की जन्म और मृत्यु होती है। 

तीनों देवताओं (Tridev) की स्थिति देवी भागवत पुराण (Devi Bhagavat Puran) तीसरा स्कंध, अध्याय 5, पृष्ठ संख्या 123। देवी भागवत पुराण (Devi Bhagavat Puran) तीसरा स्कंध, अध्याय 5, पृष्ठ संख्या 123 पर श्री विष्णु जी ने श्री दुर्गा जी की स्तुति करते हुए कहा – ‘तुम शुद्ध स्वरूपा हो, यह सारा संसार तुम्हीं से उद्भासित हो रहा है। मैं (विष्णु), ब्रह्मा और शंकर, हम सभी तुम्हारी कृपा से ही विद्यमान हैं। हमारा जन्म (आविर्भाव) और मृत्यु (तिरोभाव) हुआ करता है; अर्थात, हम तीनो देवता नाशवान हैं। केवल तुम ही नित्य हो। तुम सनातनी देवी/जगतजननी/ प्रकृति देवी हो (प्राचीन काल से विद्यमान हो)। 

भगवान शंकर बोले – ‘देवी, यदि महाभाग विष्णु तुम्हीं से प्रकट (उतपन्न) हुए हैं, तो उनके बाद उत्पन्न होने वाले ब्रह्मा भी तुम्हारे  ही बालक हुए, और फिर मैं, तमोगुणी लीला करने वाला शंकर,  क्या तुम्हारी सन्तान नहीं हुआ अर्थात मुझे भी उत्पन्न करने वाली तुम ही हो। इस संसार की सृष्टि, स्थिति और संहार में तुम्हारे गुण सदा समर्थ हैं। उन्ही तीनों गुणों से उत्पन्न हम, ब्रह्मा, विष्णु और शंकर, नियमानुसार कार्य में तत्पर रहते हैं। 

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इसमें स्पष्ट हो गया कि इनकी जन्म मृत्यु होती है और इनकी माता दुर्गा है और दुर्गा को प्रकृति भी कहते हैं और यही तीन गुण हैं और जीवों को अपने किए कर्मों का ही फल देते हैं। 

God Vs Supreme God: वेदों (Vedas) और अन्य ग्रन्थों के अनुसार कौन है भगवान 

सभी धर्मों के धार्मिक ग्रंथ प्रमाणित करते हैं कि परमपिता परमेश्वर कभी भी माँ से जन्म नहीं लेते। ऋग्वेद मंडल 10 सूक्त 4 मंत्र 3

“शिशुम् न त्वा जेन्यम् वर्धयन्ती माता विभर्ति सचनस्यमाना

धनोः अधि प्रवता यासि हर्यन् जिगीषसे पशुरिव अवसृष्टः।। 

अनुवाद: हे पूर्ण परमात्मा! जब आप (शिशुम्) शिशु रूप धारण करते हो अर्थात् नवजात शिशु के रूप में प्रकट होते हो तो (त्वा) आपको कोई (माता) माता (जेन्यम्) जन्म देकर (विभर्ति) पालन पोषण करके (न वर्धयन्ती) बड़ा नहीं करती। अर्थात् पूर्ण परमात्मा का जन्म माता के गर्भ से नहीं होता। (सचनस्यमाना) वास्तव में आप अपनी रचना (धनोः अधि) शब्द शक्ति के द्वारा करते हो तथा (हर्यन्) भक्तों के दुःख हरण हेतु (प्रवता) नीचे के लोकों को मनुष्य की तरह आकर (यासि) प्राप्त करते हो। (पशुरिव) पशु की तरह कर्म बन्धन में बंधे प्राणी को काल से (जिगीषसे) जीतने की इच्छा से आकर (अव सृष्टः) सुरक्षित रचनात्मक विधि अर्थात् शास्त्रविधि अनुसार साधना द्वारा पूर्ण रूप से मुक्त कराते हो। 

जबकि ब्रह्मा ,विष्णु, महेश जी की माता दुर्गा तथा पिता ज्योति निरंजन काल है।इनकी जन्म व् मृत्यु होती है।( प्रमाण देवी भागवत पुराण तीसरा स्कन्द अध्याय 5 के पृष्ठ 123 में उल्लिखित है।) जबकि पूर्ण ब्रह्म कबीर जी का माता- पिता के योग से बना शरीर नहीं है। 

गीता (Gita) के अनुसार अविनाशी भगवान कबीर साहेब (Immortal God Kabir) जी है

पूर्ण परमात्मा से प्राणी मुक्त हो सकता है जो सतलोक में तथा प्रत्येक प्राणी के हृदय में भी और हर जीव आत्मा के साथ ऐसे रहता जैसे हवा रहती है गंध के साथ भगवान ने अर्जुन को अपनी पूजा भी त्याग कर उस एक परमात्मा (पूर्ण ब्रह्म ) की शरण में जाने की सलाह दी है कि उस परमात्मा की शरण में जाकर तेरा पूर्ण रूप से छुटकारा हो जाएगा अर्थात जन्म मृत्यु से पूर्ण रूप से मुक्त हो जाएगा तथा मेरा (काल भगवान) का पूज्य देव वही पूर्ण परमात्मा है जिनका प्रमाण  गीता अध्याय 18 के श्लोक 62,66 में किया है तथा गीता अध्याय 8 के श्लोक 8, 9, 10, 20, 21, 22  में  कहा है। वही अविनाशी भगवान है। 

कबीर जी की वाणी में तीनों देवताओं की स्थिति

परमेश्वर कबीर जी ने अपनी वाणी में स्पष्ट किया है कि, 

तीन देव की जो करते भक्ति। 

उनकी कदे न होवे मुक्ति।। 

गुण तीनों की भक्ति में यह भूल पड़ो संसार। 

कहे कबीर निज नाम बिना कैसे उतरे पार।। 

Kabir Saheb Ji is suprme god

पूर्ण संत की शरण में जाकर शास्त्र अनुसार सतभक्ति वास्तविक नाम जाप नहीं करेंगे तब तक पूर्ण मोक्ष मिलना दुर्लभ है

संत शरण में आने से, आई टले बला।

जो मस्तक में सूली हो, वो कांटे में टल जाए।। 

पूर्ण संत की शरण में जाकर उनके द्वारा बताई गई भक्ति साधना करने से परमात्मा साधक के सर्व पाप कर्मों को क्षमा कर देते हैं और भविष्य में मौत भी आने वाली हो तो उसे कांटे में टाल देते हैं। 

पाप नाशक है पूर्ण परमात्मा इसका प्रमाण

  • ऋग्वेद, मंडल १०, सूक्त १६३, मंत्र १ 

अक्षीभ्यां ते नासिकाभ्यां कर्णाभ्यां छुबुकादधि ।

यक्ष्मं शीर्षण्यं मस्तिष्काज्जिह्वाया वि वृहामि ते ॥१॥ 

परमात्मा पाप कर्म से हमारा नाश करने वाले हर कष्ट को दूर कर विषाक्त रोग को काटकर हमारे नाक, कान, मुख, जिव्हा, शीर्ष, मस्तिष्क सभी अंग-प्रत्यंगों की रक्षा कर सकते हैं। वर्तमान में उस पूर्ण परमात्मा की जानकारी बताने वाले पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज हैं। जिनसे नाम उपदेश लेकर मर्यादा पूर्ण आजीवन सत भक्ति करने से सर्व सुख व पूर्ण मोक्ष मिलना संभव है। आप सभी से विनम्र निवेदन है जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं।

Credit: SA News Channel: Read Full Article about God Vs Supreme God on SA News Channel


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