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Karnataka Hijab Controversy: नारेबाजी, पथराव, लाठीचार्ज हिजाब पर कर्नाटक में बवाल

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Karnataka Hijab Controversy [Hindi] क्या होता है हिजाब, क्या है विवाद
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Karnataka Hijab Controversy: कर्नाटक में हिजाब विवाद ने पूरी तरह राजनीतिक रंग ले लिया है। हिजाब के समर्थन और विरोध में स्टूडेंट्स समूहों में बंट गए हैं। हिजाब के जवाब में कुछ स्टूडेंट भगवा गमछा और शॉल के साथ स्कूल, कॉलेजों में एंट्री की मांग कर रहे हैं। इस बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने हिजाब के समर्थन को ‘गजवा-ए-हिंद’ मानसिकता से जोड़ दिया है।

Karnataka Hijab Controversy: क्या है विवाद?

कर्नाटक में हिजाब पर विवाद की शुरुआत जनवरी महीने में उडुपी शहर से हुई थी। शहर के प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में 6 छात्राओं को हिजाब पहनने के कारण कक्षा में प्रवेश नहीं दिया गया था। कॉलेज प्रशासन ने इसका कारण ड्रेस में समानता को रखना बताया है। इसके बाद यह विवाद राज्य के कई जिलों में बढ़ता ही चला गया। कई संस्थानों में छात्राओं ने हिजाब पहनकर आना शुरू किया तो इसके विरोध में छात्र भगवा गमछा पहनकर आने लगे। 

क्या होता है हिजाब?

हिजाब नकाब से काफी अलग होता है. हिजाब का मतलब पर्दे से है. बताया जाता है कि कुरान में पर्दे का मतलब किसी कपड़े के पर्दे से नहीं बल्कि पुरुषों और महिलाओं के बीच के पर्दे से है. वहीं, हिजाब में बालों को पूरी तरह से ढकना होता है यानी हिजाब का मतलब सिर ढकने से है. हिजाब में महिलाएं सिर्फ बालों को ही ढकती हैं. किसी भी कपड़े से महिलाओं का सिर और गर्दन ढके होना ही असल में हिजाब कहा जाता है, लेकिन महिला का चेहरा दिखता रहता है.

क्या होता है बुर्का और नकाब?

  • बुर्का- बुर्का एक चोले की तरह होता है, जिसमें महिलाओं का शरीर पूरी तरह से ढका होता है. इसमें सिर से लेकर पांव तक पूरा शरीर ढकने का साथ आंखों पर एक पर्दा किया जा सकता है. इसके लिए आंखों के सामने एक जालीदार कपड़ा लगा होता है, जिससे कि महिला बाहर का देख सके. इसमें महिला के शरीर का कोई भी अंग दिखाई नहीं देता. कई देशों में इसे अबाया भी कहा जाता है.
  • नकाब- नकाब एक तरह से कपड़े का परदा होता है, जो सिर और चेहरे पर लगा होता है. इसमें महिला का चेहरा भी नज़र नहीं आता है. लेकिन, नकाब में आंखें कवर नहीं होती हैं. हालांकि, चेहरे पर यह बंधा होता है.
  • दुपट्टा- दुपट्टा काफी आम परिधान है. यह एक तरह से लंबा स्कार्फ होता है, जिससे सिर ढका होता है और यह कंधे पर रहता है. यह महिला की ड्रेस से मैचिंग का भी हो सकता है. साउथ एशिया में इसका इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है और इसे शरीर पर इसे ढिले-ढाले तरीके से ओढ़ा जाता है. यह हिजाब की तरह नहीं बांधा जाता है.
  • अल-अमीरा- रिपोर्ट्स के अनुसार, यह दो कपड़ों का सेट होता है. एक कपड़े को टोपी की तरह सिर पर पहना जाता है. दूसरा कपड़ा थोड़ा बड़ा होता है जिसे सिर पर लपेटकर सीने पर ओढ़ा जाता है.

कौन है नकाब वाली वह लड़की ?

भगवा गमछा में उग्र विरोध और प्रदर्शन करने वाले लड़कों के सामने डटी रहने वाली इस लड़की का नाम मुस्कान खान है. यह मांडया शहर के पीइएस काॅलेज मे ंबी.काॅम सेकंड ईयर की छात्रा है. मुस्कान का कहना है कि विरोध और प्रर्दशन करने वाले बाहर के लड़के थे. वह काॅलेज में नहीं पढ़ते हैं. मुस्कान ने कहा, ’’उन लड़कों के विरोध के वक्त काॅलेज के शिक्षकों का रुख उसके यानी मुस्कान के फेवर में था. शिक्षक उन लड़कों की भीड़ को रोकने की पूरी कोशिश कर रहे थे और उसेे उन लड़कों से बचा रहे थे. मुस्कान कहती हैं,’’ काॅलेज के उनके सभी हिंदू दोस्त उनकी इस मांग का समर्थन करते हैं और वह उनके साथ खड़े हैं. 

Karnataka Hijab Controversy: कोर्ट ने मंगवाई कुरान की प्रति

कर्नाटक हाईकोर्ट की बेंच ने मामले की सुनवाई की शुरुआत में पहले ही पॉइंट की पुष्टि के लिए पवित्र कुरान की एक प्रति मांगी। जस्टिस दीक्षित ने पूछा कि यह कुरान की प्रामाणिक प्रति है, इस पर तो कोई विवाद नहीं। कुरान की कॉपी बैंगलोर के शांतिप्रकाश पब्लिशर्स ने प्रकाशित की है। एडवोकेट जनरल ने कहा कि कुरान के कई अनुवाद हैं।

  • जस्टिस दीक्षित ने एडवोकेट देवदत्त कामत से पूछा कि मुझे किस सूरा को देखना चाहिए। तब उन्होंने कहा कि याचिका के पेज 9 पर मैंने इसे लिखा है।
  • पवित्र कुरान की आयत 24.31 और आयत 24.33 सिर पर दुपट्टा या सिर पर घूंघट को आवश्यक धार्मिक कार्य बताती है।
  • कामत ने कहा कि एक सोर्स कुरान.कॉम से है और इसे प्रामाणिक कुरान कहा जाता है।
  • भारत से लेकर विदेशों तक कई फैसलों में पवित्र कुरान के इन दो आदेशों की व्याख्या की गई है।

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ये गजवा-ए-हिंद की सोच : गिरिराज सिंह

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक के तमाम जिलों में हो रहे प्रदर्शन को देश के सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा, ‘देश के अंदर कुछ लोग देश के माहौल को बिगाड़ना चाहते हैं। गजवा-ए-हिंद की मानसिकता वाले, जो इस्लामिक स्टेट की कल्पना लेकरके भारत के सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना चाहते हैं। अगर स्कूलों में बच्चे नमाज पढ़ें, हिजाब पहने, कोई कहे कि हम हवन करेंगे, कोई कुछ और कहे तो ये समाज का माहौल बिगाड़ने की कोशिश है।

ये भारत है। सर्वधर्म समभाव के आधार पर चलेगा। भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने की मानसिकता को हम पूरा नहीं होने देंगे। इसीलिए विपक्ष में कल कुछ लोगों ने इस तरह का प्रश्न उठाया। उनके मंसूबे कभी पूरे नहीं होंगे। भारत हमेशा भारत रहेगा, भारत पाकिस्तान नहीं बनेगा।’

कांग्रेस ने कहा- हिजाब पर राजनीति कर रही है भाजपा

Karnataka Hijab Controversy: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि राज्य में अब तक हिजाब और भगवा को लेकर कोई विवाद नहीं था। भाजपा सरकार जानबूझकर इस मुद्दे को हवा दे रही है। भाजपा का मकसद इस पर राजनीति करना है। राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट कर इसे भाजपा का एजेंडा कहा था। उन्होंने इसे निजी आजादी के लिए खतरा भी बताया था।

जानें, क्या बोले लखनऊ के मुस्लिम धर्मगुरु

मुस्लिम धर्मगुरुओं के एक संगठन ने कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में छात्राओं के हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को लोकतांत्रिक मूल्यों और अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन क़रार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। मजलिस-ए-उलमा-ए-हिंद ने सोमवार को लखनऊ एक बयान जारी कर कर्नाटक सरकार के इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की और इसे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन क़रार दिया।

Karnataka Hijab Controversy: डीयू में हिजाब के समर्थन में प्रदर्शन

कर्नाटक कॉलेज में हिजाब पहनकर आ रही लड़कियों के कुछ लड़कों द्वारा विरोध का मामला मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय तक पहुंच गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी परिसर में आर्ट्स फैकल्टी के पास मंगलवार दोपहर को कुछ छात्रों ने हिजाब वाले मामले को लेकर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन की ओर से हिजाब पहनने वाली लड़कियों के समर्थन में किया गया था। करीब तीन बजे एक दर्जन छात्र छात्राएं एकत्र हुए और उन्होंने हिजाब पहनने वाली छात्राओं के समर्थन में नारेबाजी की। इनमें कई छात्राओं ने हिजाब पहन रखे थे। उन्होंने नारे लगाए कि हिजाब पर हमला नहीं सहेंगे और गुंडागर्दी नहीं सहेंगे। 

भावनाओं नहीं, कानून के हिसाब से करेंगे फैसला: हाई कोर्ट

शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनकर जाने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि हम भावनाओं नहीं, कानून के हिसाब से फैसला करेंगे। कोर्ट ने कहा, ‘हम तर्क के आधार पर बढ़ेंगे, कानून के आधार पर बढ़ेंगे न कि भावनाओं के आधार पर। हम इस आधार पर चलेंगे कि संविधान क्या कहता है। हमारे लिए संविधान भागवद्गीता है।’

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मांड्या में एक हिजाब पहनी छात्रा को आते देख भगवा गमछा लपेटे छात्रों ने जय श्री राम का नारा लगाया। छात्रा स्कूटी से उतरी और नारेबाजी कर रहे समूह के सामने अल्लाहू-अकबर का नारा लगाने लगी।

Credit: BBC Hindi

मुस्लिम छात्राओं की ओर से दलील रखते हुए वकील देवदत्त कामत ने कहा कि हिजाब पहनना मुस्लिम संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। कमात ने आगे कहा कि अगर कुछ उपद्रवी इसमें परेशानी खड़ी कर रहे हैं तो राज्य सरकार का कर्तव्य है कि इस छात्राओं को स्कूल सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था करे। वहीं, सरकार की ओर से मामले पर दलील रखते हुए एडवोकेट जनरल ने कहा कि राज्य में संस्थानों को छात्रों के यूनिफॉर्म पर निर्णय करने की छूट दी गई है। जो भी छात्र-छात्राएं इसमें छूट चाहते हैं, वह कॉलेज डेवलपमेट कमेटी के पास जा सकते हैं।

Karnataka Hijab Controversy: बढ़ रहा है विवाद

एक ओर हाईकोर्ट में हिजाब के मुद्दे पर सुनवाई चल रही था तो वहीं दूसरी ओर राज्य के पीईएस कॉलेज में विवाद बढ़ता नजर आया। यहां एक छात्रा के हिजाब पहन कर आने के विरोध में छात्र भगवा गमछा पहन कर जय श्रीराम के नारे लगाने लगे। इसके जवाब में छात्रा ने भी अल्लाह हु अकबर के नारे लगाए। वहीं, उडुपी के कॉलेज में भी हिजाब पहनकर आई छात्राओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके जवाब में भगवा गमछा पहनकर आए छात्र उनके सामने आकर नारेबाजी करने लगे। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने मामले को संभाला।


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