Lal Bahadur Shastri Death Anniversary: क्या थी प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु की वजह?

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Lal Bahadur Shastri Death [Hindi] लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु की वजह क्या थी
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Lal Bahadur Shastri Death Anniversary: देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मंगलवार को 56वीं पुण्यतिथि है। उनकी सादगी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। पूर्व प्रधानमंत्री के अनमोल विचारों से उनके संघर्ष, दृढ़ निश्चय और बुलंद इरादों की झलक साफ नजर आती है। आइए उनके सर्वश्रेष्ठ विचारों को पढ़ें और इनसे कुछ ना कुछ सीखकर अपने जीवन में लागू करें।

लाल बहादुर शास्त्री का व्यक्तित्व

लाल बहादुर शास्त्री एक विशुद्ध गांधीवादी नेता थे जिन्होंने अपना सारा जीवन सादगी और गरीबों की सेवा करने में समर्पित कर दिया. एक सादगी पसंद राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ वह एक साफ छवि वाले ईमानदार और देशभक्त प्रधानमंत्री भी थे.

Lal Bahadur Shastri Death Anniversary: क्या है शास्त्री जी की मृत्यु की वजह?

नब्बे के दशक में जब ग्रेगरी डगलस नाम के एक अमेरिकी पत्रकार की किताब आई थी, तो अमेरिका में हंगामा मच गया था और भारत के कुछ तबकों में खलबली। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के एक ऐसे जासूस के साथ बातचीत के बाद वो किताब लिखी गई थी, जिसको खुफिया ऑपरेशंस में विशेषज्ञता हासिल थी और उसका कार्यक्षेत्र रहा था सोवियत रूस, सो रूस की बदनाम खुफिया एजेंसी केजीबी कैसे काम करती है, इसका उसे जमीनी तजुर्बा था। उसका नाम था उसका रॉबर्ट ट्रम्बुल क्राउले और वो सीआए में 1947 से काम कर रहा था। 

इस किताब में सीआईए के कई राज थे, पर्किंसन की चपेट में आकर मौत की दहलीज पर खड़े रॉबर्ट ने भारत को लेकर भी ग्रेगरी की इस बुक ‘कन्वर्सेसंस विद द क्रो’ में दो बड़े खुलासे किए। एक शास्त्रीजी की मौत के बारे में और दूसरा भारत के परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा की विमान दुर्घटना में रहस्मयी मौत को लेकर।

Lal Bahadur Shastri Death Anniversary: शास्त्री जी का पार्थिव शरीर और संदेह का साया 

सालों हो गए इस किताब को आए, फिर भी कभी भारत सरकार ने सीआईए के नजरिए से शास्त्रीजी की मौत की जांच की हो, कभी सुना नहीं। हालांकि एक तबका ये भी कहता है कि केजीबी से ध्यान हटाने के लिए सीआईए के पूर्व जासूस को दौलत के बल पर कुछ भी बुलवा देना केजीबी के बाएं हाथ का खेल था। कुछ और भी वजहें थीं, जिनके चलते लोगों को शास्त्रीजी की ताशकंद में मौत स्वभाविक नहीं लगी।
 जब शास्त्रीजी का पार्थिव शरीर भारत लाया गया तो सबसे पहले शास्त्रीजी की मां ने उनके शरीर का मुआयना किया और पाया कि कई जगह नीले रंग के निशान है और पेट के पास किसी हथियार से काटने का भी। उन्होंने उसी वक्त कहा था कि मेरे बिटवा को जहर दिया गया है, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी।

कुलदीप नैयर और पीछा करते सवाल 

कई साल बाद जब आरटीआई से अनुज धर, कुलदीप नैय्यर जैसे लोगों ने लगातार कई आरटीआई डालकर पूछा गया तो पता चला कि पोस्टमार्टम तो हुआ ही नहीं था, बाद में जब फजीहत हुई तो सरकार ने बताया कि शास्त्रीजी के पर्सनल डॉक्टर डॉ. आरएन चुघ और कुछ रूसी डॉक्टरों ने शव का मुआयना, पड़ताल की थी। लेकिन सरकार के इन बदलते बयानों को लेकर संदेह गहराता ही गया।


दूसरे जब मोरारजी देसाई सरकार ने एक जांच कमेटी बनाई तो उससे पहले ही डॉ. चुघ जैसे कई गवाहों की मौत हो चुकी थी। चुघ की मौत ट्रक से एक्सीडेंट में हुई और निजी सेवक रामनाथ को एक कार ने कुचल दिया, पैर बेकार हो गए और याददाश्त चली गई।

Lal Bahadur Shastri Death: शास्त्री जी की मौत का राज आज भी है अनुसलझा

लाल बहादुर शास्त्री की मौत की गुत्थी अभी भी नहीं सुलझी है। 1965 में पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम के बाद लाल बहादुर शास्त्री सोवियत संघ का हिस्सा रहे उज्बेकिस्तान के ताशकंद गए थे, जहां उन्हें पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करना था। 10 जनवरी 1966 को भारत और पाकिस्तान के बीच ताशकंद समझौता हुआ और इस समझौते के महज 12 घंटे बाद ही 11 जनवरी को तड़के 1 बजकर 32 मिनट पर उनकी मौत हो गई।

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शास्त्री जी की मौत के बाद उनके रिश्तेदारों और उनके जानने वालों ने षड्यंत्र की आशंका जताई थी। कहा जाता है कि शास्त्री जी मौत से आधे घंटे पहले तक बिल्कुल ठीक थे, लेकिन 15 से 20 मिनट में उनकी तबियत खराब हो गई। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें इंट्रा-मस्कुलर इंजेक्शन दिया। इंजेक्शन देने के चंद मिनट बाद ही उनकी मौत हो गई।

शास्त्री विशाल पलंग में निर्जीव पड़े थे

Lal Bahadur Shastri Death: किताब में आगे लिखा, “मुझे बरामदे में कोशिगिन खड़े दिखाई दिए. उन्होंने अपने हाथ खड़े करके शास्त्री के नहीं रहने का संकेत दिया. शास्त्री विशाल पलंग पर निर्जीव थे. पास ही कालीन पर बड़ी तरतीब से उनके स्लीपर पड़े हुए थे. कमरे के एक कोने में पड़ी ड्रेसिंग टेबल पर एक थर्मस लुढ़का पड़ा था. ऐसा लगता था कि शास्त्री ने इसे खोलने की कोशिश की थी. कमरे में कोई घंटी नहीं थी. इस चुक को लेकर जब संसद में सरकार पर हमला किया गया था तो सरकार साफ झठ बोल गई थी.”

बेटी ने फोन पर क्या बातचीत की थी

नैयर की किताब के अनुसार, ” रात करीब 11 बजे उनके सचिव जगन्नाथ सहाय ने शास्त्री से पूछा कि क्या वो अपने घर पर बात करना चाहेंगे, क्योंकि पिछले दो दिनों से उनकी अपने परिवार से बात नहीं हो पाई थी. शास्त्री ने पहले तो ना कहा, फिर इरादा बदलकर नंबर मिलाने के लिए कहा. ये भी हाटलाइन थी, इसलिए नंबर तुरंत मिल गया. “

Lal Bahadur Shastri Quotes in Hindi

  • अनुशासन और एकजुट होकर काम करना राष्ट्र के लिए ताकत का असली स्रोत है।
  • हमें शांति के लिए बहादुरी से लड़ना चाहिए जैसे हम युद्ध में लड़े थे।
  • यह अत्यंत खेद की बात है कि आज परमाणु ऊर्जा का उपयोग परमाणु हथियार बनाने के लिए किया जा रहा है।
  • शासन का मूल विचार, समाज को एक साथ रखना है ताकि यह विकसित हो सके और कुछ लक्ष्यों की ओर अग्रसर हो सके।
  • सच्चा लोकतंत्र या जनता का स्वराज असत्य और हिंसक साधनों से कभी नहीं आ सकता!
  • मैं उतना सरल नहीं हू जितना मैं दिखता हूं।
  • हम न केवल अपने लिए बल्कि पूरी दुनिया के लोगों के लिए शांति और शांतिपूर्ण विकास में विश्वास रखते हैं।
  • हमारे लिए हमारी ताकत और स्थिरता के लिए हमारे लोगों की एकता और एकजुटता के निर्माण के कार्य से अधिक महत्वपूर्ण कोई नहीं है।
  • स्वतंत्रता की रक्षा करना केवल सैनिकों का कार्य नहीं है। पूरे देश को मजबूत होना है।
  • आर्थिक मुद्दे हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं और यह सबसे महत्वपूर्ण है कि हमें अपने सबसे बड़े दुश्मनों – गरीबी, बेरोजगारी से लड़ना चाहिए।
  • विज्ञान और वैज्ञानिक कार्यों में सफलता असीमित या बड़े संसाधनों के प्रावधान से नहीं बल्कि समस्याओं और उद्देश्यों के बुद्धिमान और सावधानीपूर्वक चयन से मिलती है। सबसे बढ़कर, जो आवश्यक है वह है कड़ी मेहनत और समर्पण।
  • देश के प्रति वह निष्ठा अन्य सभी निष्ठाओं से आगे आती है। और यह पूर्ण निष्ठा है क्योंकि कोई इसे प्राप्त करने के संदर्भ में नहीं तौल सकता है।
  • अब हमें शांति के लिए उसी साहस और दृढ़ संकल्प के साथ लड़ना है, जैसा कि हमने आक्रमण के खिलाफ लड़ा था।
  • हम सिर्फ खुद के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की शांति, विकास और कल्याण में विश्वास रखते हैं।
  • यदि कोई व्यक्ति हमारे देश में अछूत कहा जाता है तो भारत को अपना सर शर्म से झुकाना पड़ेगा।
  • आज़ादी की रक्षा केवल सैनिकों का काम नहीं है। पूरे देश को मजबूत होना होगा।

लाल बहादुर शास्त्री को दिए गए सम्मान

सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट योगदान और देशभक्ति के लिए उन्हें वर्ष 1966 में भारत रत्न के पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

लाल बहादुर शास्त्री का राजनैतिक योगदान

लाल बहादुर शास्त्री ने स्वाधीनता आंदोलनों में बढ़-चढ़कर भाग लिया. लगभग सभी आंदोलनों में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा. स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त करने के बाद वह गांधी जी के साथ स्वतंत्रता के मार्ग पर पूर्ण रूप से अग्रसर रहे. स्वाधीनता आंदोलनों में अपनी सक्रिय भागीदारी की वजह से उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा.

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राजनैतिक क्षेत्र में वे सबसे अधिक गोविंद वल्लभ पंत और जवाहरलाल नेहरू से प्रभावित हुए. भारत को पूर्ण स्वतंत्रता मिलने के पश्चात लाल बहादुर शास्त्री जी को उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया गया साथ ही गोविंद वल्लभ पंत के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए वह प्रहरी एवं यातायात मंत्री भी बने. अपने कार्यकाल में उन्होंने पहली बार किसी महिला को संवाहक (कंडक्टर) के पद पर नियुक्त किया इसके अलावा भीड़ को नियंत्रण में रखने के लिए लाठी के जगह पानी की बौछार का प्रयोग भी लाल बहादुर शास्त्री ने ही प्रारंभ कराया.

Drishti IAS : English

इसके बाद 1951 में,  जवाहर लाल नेहरु के नेतृत्व में वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव बनें और फिर यहीं से उनका कद निरंतर बढ़ता गया. अपने साफ और निष्पक्ष आचरण के लिए उन्हें सन 1963 में कॉग्रेस सरकार की ओर से भारत का प्रधानमंत्री निर्वाचित किया गया.

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म कहाँ हुआ था?

लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म एक बहुत ही साधारण परिवार में 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ।

लाल बहादुर शास्त्री कौन सी जाति के थे?

संस्कृत में स्नातक की उपाधि को “शास्त्री” कहा जाता है और यही वजह है कि लाल बहादुर शास्त्री जी ने अपने नाम के पीछे से अपनी जाति “श्रीवास्तव” को हटाकर “शास्त्री” का इस्तेमाल किया

लाल बहादुर शास्त्री जयंती कब है?

लाल बहादुर शास्त्री जी जयंती 2 अक्टूबर 1904 को है

लाल बहादुर शास्त्री के माता पिता का नाम क्या था?

लाल बहादुर शास्त्री की माता का नाम रामदुलारी श्रीवास्तव और पिता का नाम मुंशी-शारदाप्रसाद श्रीवास्तव था।

Lal Bahadur Shastri Death: लाल बहादुर शास्त्री जी की मृत्यु कब और कैसे हुई?

ताशकंद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर 11 जनवरी 1966 को हस्ताक्षर करने के कुछ देर बाद ही रात में संदिग्ध परिस्थिति में उनकी मृत्यु हो गई।


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