Google doodle: महान वैज्ञानिक Stephen Hawking के जन्मदिन पर गूगल ने बनाया Doodle

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Stephen Hawking Google Doodle वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का जीवन
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Stephen Hawking Google Doodle: महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग (scientist stephen hawking) की 80वीं जयंती पर गूगल ने डूडल बनाकर एक एनिमेटेड वीडियो के जरिए श्रद्धांजलि दी है. Google ने हॉकिंग को “इतिहास के सबसे प्रभावशाली वैज्ञानिक को एक वीडियो के रूप में दिखाने की कोशिश की है. हॉकिंग एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे जिन्होंने फिजिक्स (physics) और उससे आगे के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था. एक एनिमेटेड वीडियो बनाकर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी है. उनके अद्भुत योगदान में ब्रह्मांड विज्ञान, गुरुत्वाकर्षण (gravity), ब्लैक होल (Black Hole) पर आधारित क्वांटम सिद्धांत, थर्मोडायनामिक्स और सूचना सिद्धांत शामिल हैं.

वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का जीवन

स्टीफन हॉकिंग (Stephen Hawking) जन्म 08 जनवरी 1942 को एक शोध जीवविज्ञानी और चिकित्सा शोधकर्ता के परिवार में हुआ था. स्टीफन हॉकिंग, 1962 में यूनिवर्सिटी कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में भौतिकी में स्नातक की डिग्री ली थी. फिर उन्होंने 1966 में ट्रिनिटी हॉल, कैम्ब्रिज से पीएचडी की पढ़ाई की, जहां उन्हें कैंब्रिज में गोनविले और कैयस कॉलेज में एक research fellow के रूप में चुना गया था. उन्होंने “ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम” नामक एक पुस्तक भी लिखी जो 1988 में प्रकाशित हुई थी.

Stephen Hawking Google Doodle: स्टीफन हॉकिंग को क्या बीमारी थी?

इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में जन्मे स्टीफन हॉकिंग बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि वाले थे. 21 साल की उम्र तक आते-आते वह एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी Amyotrophic Lateral Sclerosis (ALS) की चपेट में आ गए थे. ALS बीमारी में मनुष्य का तंत्रिका तंत्र (Nervous System) धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है. फिर धीरे-धीरे पूरे शरीर की मूवमेंट बंद हो जाती है. इससे वह धीरे-धीरे व्हीलचेयर पर आ गए. तब डॉक्टरों ने कह दिया था कि वह दो साल से ज्यादा जी नहीं पाएंगे.

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Stephen Hawking Google Doodle: स्पेस साइंस में Stephen Hawking का योगदान

स्टीफन हॉकिंग ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति से डॉक्टरों की भविष्यवाणी को झूठा साबित कर दिया. उस समय स्टीफन हॉकिंग का दिमाग छोड़कर शरीर का कोई भी अंग काम नहीं करता था. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बड़े वैज्ञानिक बने. उन्होंने अपनी बोलने की क्षमता खो दी, तो स्पीच-जेनरेटिंग डिवाइस के माध्यम से संवाद करना शुरू किया. उन्होंने स्पेस साइंस में बड़ा योगदान दिया. उनकी उपलब्धियों में सिंगुलैरिटी का सिद्धांत, ब्लैक होल का सिद्धांत, कॉस्मिक इन्फ्लेशन थ्योरी, यूनिवर्स का वेव फंक्शन मॉडल और टॉप-डाउन थ्योरी शामिल है.

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ब्लैक होल के प्रति जुनूनी थे Stephen Hawking

स्टीफन हॉकिंग बचपन से ही ब्रह्मांड के प्रति आकर्षित थे. वह ब्लैक होल के प्रति जुनूनी थे, जो उनके अध्ययन और शोध का आधार बना. हॉकिंग ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त करने से पहले, ऑक्सफोर्ड से भौतिकी में बीए की डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की. 1974 में उन्होंने पाया कि कण ब्लैक होल से बच सकते हैं. इस सिद्धांत को भौतिकी में उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है.

डॉक्टरों की भविष्यवाणी को किया झूठा साबित

न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी की चपेट में इंसान के तंत्रिका तंत्र के काम न करने की वजह से शरीर की मूवमेंट बंद हो जाती है। स्टीफन हॉकिंग बीमारी की इलाज के लिए अस्पताल गए, तो डॉक्टरों ने कहा कि वह 2 साल तक ही जिंदा रह सकते हैं। लेकिन उन्होंने डॉक्टरों की भविष्यवाणी को गलत साबित किया और 76 साल तक जिंदा रहे।


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