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लो BP और हाई BP: क्यों ज़रूरी है संतुलन?
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लो BP और हाई BP दोनों ही खतरनाक हो सकते हैं। समय पर पहचान और सही प्रबंधन से जीवन सुरक्षित रखा जा सकता है।
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लो BP का मतलब है ब्लड प्रेशर सामान्य से कम होना। इससे चक्कर, कमजोरी और बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है।
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हाई BP तब होता है जब रक्तचाप सामान्य से अधिक हो। यह दिल, किडनी और दिमाग पर दबाव डालता है।
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लो BP में थकान, चक्कर, धुंधली दृष्टि, ठंडा पसीना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई मुख्य लक्षण माने जाते हैं।
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हाई BP के दौरान सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, नाक से खून, धड़कन तेज होना और सांस फूलना जैसी समस्याएँ होती हैं।
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नमकयुक्त भोजन, पानी की पर्याप्त मात्रा, छोटे-छोटे भोजन और पर्याप्त नींद लो BP को नियंत्रण में रखने में मदद करते हैं।
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कम नमक का सेवन, नियमित व्यायाम, तनाव कम करना और फल-सब्ज़ियों से भरपूर आहार हाई BP नियंत्रित करने का उपाय है।
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पानी पिएं, थोड़ा नमक लें, लेट जाएं और पैरों को ऊंचा रखें। यह रक्त प्रवाह बेहतर करने में मदद करता है।
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तनाव कम करें, गहरी सांस लें, ज्यादा नमक वाले भोजन से बचें और डॉक्टर द्वारा दी दवा समय पर लें।
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संतुलित आहार, योग, ध्यान, धूम्रपान और शराब से दूरी दोनों प्रकार के BP को नियंत्रित करने में कारगर उपाय हैं।
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लो BP और हाई BP का संतुलित प्रबंधन आपको स्वस्थ रखता है। सही आदतें अपनाकर लंबा और सुरक्षित जीवन पाएं।