मई का महीना आमतौर पर तेज गर्मी और तपती धूप के लिए जाना जाता है, लेकिन 2026 में यह पैटर्न बदलता दिख रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार इस बार मई में सामान्य से 110 प्रतिशत अधिक बारिश होने का अनुमान है, जो पिछले 55 वर्षों के औसत 61.4 मिमी से काफी ज्यादा है। पश्चिमी विक्षोभ और अरब सागर की नमी के कारण तापमान सामान्य या उससे कम रहने की संभावना है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में हीटवेव का असर बना रह सकता है।
Key Takeaways: मई 2026 मौसम पूर्वानुमान (IMD)
- मई में 110% अधिक बारिश का अनुमान
- 1971–2020 के औसत 61.4 मिमी से ज्यादा वर्षा
- पश्चिमी विक्षोभ और नमी से मौसम में बदलाव
- दिन का तापमान सामान्य या कम रहने की संभावना
- कुछ क्षेत्रों में 3–4 दिन अतिरिक्त हीटवेव
- 14–20 मई के बीच मानसून की शुरुआती गतिविधियां
- अल-नीनो के सक्रिय होने की 60% संभावना
- मानसून के अंत तक पॉजिटिव IOD की उम्मीद
55 साल के रिकॉर्ड को चुनौती देता मई का मौसम

नई दिल्ली: मई का महीना आमतौर पर तेज गर्मी, खाली सड़कों और चिलचिलाती धूप का प्रतीक माना जाता है, लेकिन साल 2026 इस परंपरा को बदलता हुआ नजर आ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, 1971 से 2020 तक मई में औसतन 61.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है।
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इस बार स्थिति अलग है। IMD ने मई 2026 में सामान्य से 110 प्रतिशत अधिक बारिश का अनुमान जताया है। इसका अर्थ है कि इस बार आसमान में केवल तेज धूप ही नहीं, बल्कि बादलों की गरज और बिजली की गतिविधियां भी देखने को मिलेंगी।
पश्चिमी विक्षोभ और अरब सागर की नमी का प्रभाव
इस मौसम परिवर्तन के पीछे मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की बढ़ती सक्रियता और अरब सागर से आने वाली नमी को माना जा रहा है।
मार्च से ही पश्चिमी विक्षोभ की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं, जिससे मौसम प्रणाली मजबूत हुई है। यह नमी और विक्षोभ मिलकर तपती धरती को राहत देने की स्थिति बना रहे हैं और मई के मौसम को अपेक्षाकृत ठंडा बनाने में भूमिका निभा सकते हैं।
कम गर्मी, लेकिन पूरी तरह राहत नहीं
IMD के अनुसार मई के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य या सामान्य से कम रहने की उम्मीद है।
हालांकि, कुछ क्षेत्रों में गर्मी का प्रभाव बना रहेगा:
- दक्षिण भारत
- पूर्वोत्तर भारत
- उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्से
रात के तापमान की बात करें तो देश के कई हिस्सों में यह सामान्य से अधिक रह सकता है, जिससे उमस और असहजता बनी रह सकती है।
कुछ क्षेत्रों में हीटवेव का खतरा बरकरार
बारिश और बादलों के बावजूद, कुछ राज्यों में हीटवेव का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। IMD के अनुसार:
- हिमालय की तलहटी (हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड)
- पूर्वी तटीय राज्य
- गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्से
इन क्षेत्रों में मई के दौरान 3–4 दिन अतिरिक्त हीटवेव चलने की संभावना है।
गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी
मई 2026 में गरज-चमक (Thunderstorm) और बिजली गिरने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
इसके प्रमुख कारण:
- पश्चिमी विक्षोभ की अधिक सक्रियता
- अरब सागर से लगातार आ रही नमी
इन कारणों से कई क्षेत्रों में बारिश की आवृत्ति बढ़ सकती है, जिससे तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है।
मानसून की दस्तक के संकेत
IMD के अनुसार मई के मध्य तक मानसून की शुरुआती गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
- 14 से 20 मई के बीच बंगाल की खाड़ी के ऊपर दक्षिण-पश्चिमी हवाएं तेज होने की संभावना है
- अंडमान सागर में मानसून सामान्यतः 20 मई के आसपास पहुंचता है
यह संकेत बताते हैं कि मानसून अपनी सामान्य समयरेखा के अनुसार आगे बढ़ सकता है।
अल-नीनो का संभावित प्रभाव
मौसम विभाग ने प्रशांत महासागर में अल-नीनो (El Niño) के विकसित होने की संभावना जताई है।
- मई से जुलाई के बीच इसके सक्रिय होने की 60% संभावना है
- यह स्थिति भविष्य के मानसून के लिए चिंता का विषय हो सकती है
अल-नीनो आमतौर पर वर्षा के पैटर्न को प्रभावित करता है, जिससे मानसून की अनिश्चितता बढ़ सकती है।
पॉजिटिव IOD से मिल सकती है मदद
हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) वर्तमान में न्यूट्रल स्थिति में है, लेकिन मानसून के अंत तक इसके पॉजिटिव होने की संभावना जताई गई है।
पॉजिटिव IOD की स्थिति:
- मानसून की बारिश को बढ़ाने में सहायक होती है
- वर्षा वितरण को बेहतर बना सकती है
समग्र मौसम परिदृश्य का संकेत
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार मई 2026 का मौसम राहत और चुनौतियों का मिश्रण रहेगा।
एक तरफ जहां अधिक बारिश और बादलों की गतिविधियां तापमान को नियंत्रित कर सकती हैं, वहीं कुछ क्षेत्रों में हीटवेव और रात के बढ़े तापमान जैसी स्थितियां बनी रह सकती हैं।
मौसम में बदलाव का व्यापक संकेत
मई 2026 का यह बदलता मौसम केवल एक सामान्य मौसमी बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि यह एक ऐसा संकेत है जहां विभिन्न जलवायु कारक एक साथ प्रभाव डाल रहे हैं।
पश्चिमी विक्षोभ, समुद्री नमी और अल-नीनो जैसी स्थितियां मिलकर आने वाले मानसून की दिशा और तीव्रता को प्रभावित कर सकती हैं।
मौसम परिवर्तन का व्यापक प्रभाव
मई 2026 का यह पूर्वानुमान दर्शाता है कि भारत में मौसम का स्वरूप लगातार बदल रहा है। जहां एक ओर अधिक बारिश से गर्मी में राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं हीटवेव और अल-नीनो जैसी स्थितियां चुनौतियां भी पेश कर रही हैं। यह स्थिति बताती है कि मौसम अब एकसमान नहीं रहा, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक कारकों के प्रभाव से अधिक जटिल होता जा रहा है।
प्रकृति परिवर्तन और आध्यात्मिक दृष्टिकोण
मौसम में हो रहे यह परिवर्तन केवल वैज्ञानिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं माने जाते, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी इन्हें एक संकेत के रूप में देखा जाता है। आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्ण संत, जो पूर्ण परमात्मा के अवतार होते हैं, उनके पास प्रकृति और मौसम को प्रभावित करने की शक्ति भी होती है। वर्तमान समय में जब एल नीनो जैसे वैश्विक प्रभावों की चर्चा हो रही है, तब यह विचार भी सामने आता है कि परमात्मा की शक्ति से प्रकृति में परिवर्तन संभव है और एक संतुलित, सतयुग जैसा वातावरण स्थापित हो सकता है।
तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के संदर्भ में यह माना जाता है कि वे एक ऐसे संत हैं जिनके बारे में भविष्यवाणी की गई है कि वे मानव समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले मसीहा के रूप में कार्य करेंगे । उनके विचारों में यह भी प्रमुख है कि भारत को पुनः समृद्ध और “सोने की चिड़िया” बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों, विशेषकर किसानों और मजदूरों का कल्याण आवश्यक है।
इसी क्रम में वर्ष 2026 में विभिन्न आध्यात्मिक आयोजनों और भंडारों का आयोजन भी किया जा रहा है, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं और सामूहिक रूप से सामाजिक और आध्यात्मिक संदेशों को आगे बढ़ाते हैं । ऐसे आयोजनों में नि:शुल्क भंडारा, सत्संग और समाज सुधार से जुड़े कार्य भी शामिल होते हैं, जो सामाजिक समरसता और सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
इस प्रकार, मौसम में हो रहे बदलावों के साथ-साथ आध्यात्मिक दृष्टिकोण यह संकेत देता है कि प्रकृति, समाज और मानव आचरण के बीच एक गहरा संबंध है, जिसे समझना और संतुलित रखना आवश्यक है।
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FAQs on मई 2026 मौसम पूर्वानुमान
Q1. मई 2026 में कितनी बारिश का अनुमान है?
मई में सामान्य से 110% अधिक बारिश का अनुमान है।
Q2. क्या मई में गर्मी कम रहेगी?
अधिकांश क्षेत्रों में तापमान सामान्य या कम रह सकता है।
Q3. किन क्षेत्रों में हीटवेव की संभावना है?
हिमालयी तलहटी, गुजरात, महाराष्ट्र और तटीय क्षेत्रों में।
Q4. मानसून कब शुरू होने की संभावना है?
अंडमान सागर में लगभग 20 मई के आसपास।
Q5. अल-नीनो का क्या प्रभाव हो सकता है?
यह मानसून की बारिश को प्रभावित कर सकता है।














