देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 11 दिनों के भीतर चौथी बार बढ़ोतरी की गई है। सोमवार को पेट्रोल के दाम में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पहुंच गया। लगातार बढ़ती वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों, ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होने को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। तेल विपणन कंपनियों पर बढ़ते नुकसान का दबाव भी सामने आया है।
पेट्रोल-डीजल कीमत बढ़ोतरी: प्रमुख बातें
- 11 दिनों में चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
- पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हुआ
- दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पहुंचा
- कुल बढ़ोतरी करीब ₹7.5 प्रति लीटर तक पहुंची
- ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट को मुख्य वजह बताया गया
- OMCs को प्रतिदिन करीब ₹1,000 करोड़ नुकसान होने की बात कही गई
- Brent Crude $100 प्रति बैरल से नीचे फिसला
- विशेषज्ञों ने महंगाई और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने की आशंका जताई
11 दिनों में चौथी बार बढ़े ईंधन के दाम

सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी की गई। यह पिछले 11 दिनों के भीतर चौथी बढ़ोतरी है। राज्य संचालित तेल कंपनियां लगातार बढ़ती वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के बीच अपने नुकसान की भरपाई के लिए दामों में संशोधन कर रही हैं।
इस ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर हो गया है। इससे पहले 23 मई को पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।
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विश्लेषकों के अनुसार लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर परिवहन, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के नए दाम
पेट्रोल के नए दाम
| शहर | नई कीमत (प्रति लीटर) | बढ़ोतरी |
| दिल्ली | ₹102.12 | +₹2.61 |
| कोलकाता | ₹113.51 | +₹2.87 |
| मुंबई | ₹111.21 | +₹2.72 |
| चेन्नई | ₹107.77 | +₹2.46 |
डीजल के नए दाम
| शहर | नई कीमत (प्रति लीटर) | बढ़ोतरी |
| दिल्ली | ₹95.20 | +₹2.71 |
| कोलकाता | ₹99.82 | +₹2.80 |
| मुंबई | ₹97.83 | +₹2.81 |
| चेन्नई | ₹99.55 | +₹2.57 |
ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट का असर
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, वहां व्यवधान के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई।
कई सप्ताह तक भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पुराने दामों पर पेट्रोल और डीजल बेचती रहीं, जबकि उन्हें अधिक कीमत पर कच्चा तेल खरीदना पड़ रहा था। दो महीने से जारी ईरान युद्ध, जो 28 फरवरी से शुरू हुआ बताया गया है, उसके चलते कंपनियों पर नुकसान का दबाव लगातार बढ़ता गया।
रिपोर्ट्स में कहा गया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को संयुक्त रूप से प्रतिदिन ₹1,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हो रहा था।
ONGC निदेशक ने क्या कहा
सुषमा रावत ने ANI से बातचीत में कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार अस्थिरता बनी हुई है।
उन्होंने कहा, “जब भी शांति समझौते की घोषणा होती है, कच्चे तेल की कीमतें गिरने लगती हैं। लेकिन जैसे ही यह स्पष्ट होता है कि तत्काल समाधान नहीं है, कीमतें फिर बढ़ जाती हैं।”
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उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने 76 दिनों तक लोगों को राहत दी और इस दौरान कीमतें नहीं बढ़ाई गईं। उनके अनुसार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को लगभग ₹1,000 करोड़ प्रतिदिन का नुकसान हो रहा था।
Grant Thornton Bharat के विशेषज्ञ की राय
सौरभ मित्रा ने कहा कि हालिया लगातार बढ़ोतरी से OMCs को आंशिक राहत मिलेगी, लेकिन यह पूरी सुरक्षा नहीं देगी।
उन्होंने कहा कि भले ही पश्चिम एशिया की स्थिति स्थिर हो जाए, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े जोखिम पूरी तरह खत्म होने में समय लगेगा। इससे कच्चे तेल की कीमतें $90 प्रति बैरल से ऊपर बनी रह सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कमजोर रुपये के कारण कंपनियों पर दबाव बना रहेगा और आगे कुछ नियंत्रित मूल्य संशोधन की जरूरत पड़ सकती है। उनके अनुसार सरकार को कंपनियों की वित्तीय स्थिति और उपभोक्ताओं पर प्रभाव के बीच संतुलन बनाना होगा।
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट भी दर्ज की गई। रविवार को लगभग 2300 GMT पर North Sea Brent Crude 5.1 प्रतिशत गिरकर $98.22 प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं West Texas Intermediate (WTI) crude 5.2 प्रतिशत गिरकर $91.57 प्रति बैरल तक पहुंचा, हालांकि बाद में इसमें मामूली सुधार देखा गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार संभावित शांति समझौते की उम्मीदों के बीच यह गिरावट आई, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने तत्काल समाधान की संभावना को कम बताया।
महंगाई और आम उपभोक्ताओं पर असर
ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका जताई गई है। डीजल महंगा होने से परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है, जिसका असर दूध, ब्रेड और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट्स में कहा गया कि मई 16 को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। अप्रैल 2022 के बाद ईंधन कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई थीं। मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती की गई थी।
ईंधन बाजार पर बढ़ते दबाव की तस्वीर
लगातार चार बार हुई कीमत बढ़ोतरी ने यह संकेत दिया है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के ईंधन बाजार पर लगातार बना हुआ है। तेल कंपनियों के बढ़ते नुकसान, कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें और सप्लाई बाधाओं के कारण आने वाले समय में ईंधन बाजार पर दबाव बना रह सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक हालात सामान्य नहीं हुए तो इसका असर महंगाई और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों पर और अधिक दिखाई दे सकता है।
कलयुग में सतयुग की ओर संदेश
बढ़ती महंगाई, वैश्विक संघर्ष और अस्थिर परिस्थितियों के बीच लोग मानसिक शांति और सुरक्षित भविष्य की तलाश करते हैं।
संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी मानते हैं कि कलयुग में सतयुग जैसी सकारात्मक व्यवस्था की शुरुआत आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति के माध्यम से संभव है। उनके अनुयायियों के अनुसार पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब ही मानव कल्याण के लिए अवतरित हुए हैं और तत्वदर्शी संत की शरण में जाकर भक्ति करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, संयम और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। यह भी माना जाता है कि जहां विज्ञान की सीमाएं समाप्त होती हैं, वहां से परमात्मा की शक्ति और कृपा का अनुभव शुरू होता है।
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FAQs on Petrol Diesel Price Hike
1. दिल्ली में पेट्रोल की नई कीमत क्या है?
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर हो गई है।
2. डीजल की कीमत दिल्ली में कितनी हुई?
दिल्ली में डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पहुंच गया है।
3. ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह क्या बताई गई?
ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होने को मुख्य वजह बताया गया।
4. 11 दिनों में कितनी बार कीमतें बढ़ाई गईं?
11 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी की गई।
5. OMCs को कितना नुकसान होने की बात कही गई?
रिपोर्ट्स के अनुसार OMCs को प्रतिदिन करीब ₹1,000 करोड़ का नुकसान हो रहा था।

















