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कक्षा 9 में न डालें अतिरिक्त बोझ, कक्षा 6 से शुरू होगी तीसरी भाषा, सुप्रीम कोर्ट का बयान

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कक्षा 9 में न डालें अतिरिक्त बोझ, कक्षा 6 से शुरू होगी तीसरी भाषा, सुप्रीम कोर्ट का बयान

कक्षा 6 से तीसरी भाषा पॉलिसी लागू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि कक्षा 9 में तीसरी भाषा होने के कारण छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक तनाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, 9वीं के बाद बोर्ड परीक्षाओं का दबाव भी रहता है। नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार यह पॉलिसी कक्षा 5 व 6 से शुरू होगी और कक्षा 9 में अतिरिक्त बोझ नहीं होना चाहिए। थ्री लैंग्वेज सूत्र का अर्थ तीन भाषाओं का अध्ययन है। कोर्ट ने तमिलनाडु में केंद्रीय सरकार के नवोदय विद्यालयों को लेकर दायर याचिका की सुनवाई 11 अगस्त तक स्थगित कर दी।

तीसरी भाषा से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु

  • थ्री लैंग्वेज सूत्र का तात्पर्य तीन भाषाओं से है, जिसमें दो भारतीय भाषाएं और एक अन्य भाषा शामिल होगी।
  • नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार कक्षा 6 से तीसरी भाषा सिखाने का प्रावधान है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि कक्षा 9 में तीसरी भाषा को शामिल करने की आवश्यकता पर पुनर्विचार होना चाहिए।
  • तमिलनाडु में केंद्रीय सरकार के नवोदय विद्यालयों से संबंधित याचिका की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।  

3 लैंग्वेज सूत्र क्या है?

थ्री लैंग्वेज पॉलिसी का अर्थ है तीन भाषाओं का अध्ययन। नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार सरकारी और निजी विद्यालयों में विद्यार्थियों को तीन भाषाएं सिखाई जाएंगी, जिनमें दो भारतीय भाषाएं और एक अन्य भाषा शामिल होगी।

इस नीति के तहत पहली भाषा के रूप में मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा या स्थानीय भाषा को प्राथमिकता दी जाएगी। दूसरी भाषा के रूप में हिंदी या संबंधित राज्य की दूसरी भाषा तथा तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी या अन्य भाषा पढ़ाई जाएगी। जहां तक संभव हो, प्राथमिक शिक्षा भी पहली भाषा में देने पर जोर दिया गया है।

कक्षा 6 से शुरू होगी तीसरी भाषा

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान तीसरी भाषा को कक्षा 6 से शुरू करने पर सहमति व्यक्त की गई। अदालत ने कहा कि कक्षा 9 में तीसरी भाषा होने से विद्यार्थियों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव बढ़ सकता है। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इस विषय पर अपनी टिप्पणी दी।

यह मामला तमिलनाडु सरकार की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें राज्य में जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना से संबंधित मुद्दों पर सुनवाई चल रही है।

तमिलनाडु सरकार ने कहा कि बिना पर्याप्त तैयारी के इस प्रकार की व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है। राज्य का कहना है कि अतिरिक्त शिक्षकों और पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना इसे लागू करना विद्यालयों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।

तीसरी भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बयान

सुनवाई के दौरान जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने टिप्पणी की कि “9वीं में तीसरी भाषा को शामिल करने की क्या जरूरत है? भारत सरकार से कहिए कि ऐसा न करें।”

उन्होंने कहा कि तीसरी भाषा कक्षा 6 से शुरू होनी चाहिए ताकि विद्यार्थियों पर बोर्ड परीक्षाओं के दौरान अतिरिक्त मानसिक दबाव न पड़े।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीएसई की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के संवैधानिक उद्देश्य से जुड़ी है। साथ ही अदालत ने स्वदेशी भाषाओं की परिभाषा और उनके वर्गीकरण पर भविष्य में विचार की आवश्यकता का भी उल्लेख किया।

तमिलनाडु में केंद्रीय सरकार के स्कूल होंगे या नहीं?

तमिलनाडु सरकार ने नवोदय विद्यालयों की स्थापना से जुड़े निर्देशों पर सवाल उठाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस विषय पर नकारात्मक दृष्टिकोण नहीं अपनाया जाना चाहिए।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “आपके पास नवोदय विद्यालय होने ही चाहिए।”

राज्य सरकार के वकील ने जवाब दिया कि इस विषय पर अभी चर्चा चल रही है और फिलहाल कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की जा सकती।

इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “केंद्रीय सरकार पूरा खर्च वहन करेगी। आपको केवल जमीन उपलब्ध करानी है। बाकी सभी राज्यों में नवोदय विद्यालय हैं। आप तमिलनाडु को इससे क्यों वंचित कर रहे हैं? केवल इसलिए कि यह केंद्रीय सरकार की योजना है, ऐसा रवैया नहीं होना चाहिए।”

तमिलनाडु सरकार के अनुरोध पर मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त के लिए निर्धारित कर दी गई।

अंत में जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “उन्हें निर्देश लेने दीजिए। अब वहां अलग सरकार है। हमें नहीं पता कि उनकी नीति क्या है। आपका अपना शिक्षा तंत्र हो सकता है, लेकिन तमिलनाडु में केंद्रीय सरकार के स्कूलों को न रोकें।”

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