भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत पर पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश का आरोप लगाते हुए कड़ी चेतावनी दी है। वहीं, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि सिंधु जल संधि कानूनी रूप से अब भी लागू है और भारत इसे एकतरफा न तो स्थगित, न रद्द और न ही इसमें बदलाव कर सकता है। इस बीच भारत अपने पहले घोषित रुख पर कायम है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि तब तक बहाल नहीं होगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता।
सिंधु जल संधि विवाद: प्रमुख बातें (Key Takeaways)
- पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत को सिंधु जल संधि पर चेतावनी दी।
- सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि संधि कानूनी रूप से अब भी लागू है।
- पाकिस्तान मंगलवार को इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर पहला अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित करेगा।
- 21 जून को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने जल सुरक्षा पर भारत के खिलाफ युद्ध तक की चेतावनी दी थी।
- अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित किया था।
- भारत का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई तक संधि बहाल नहीं होगी।
- संधि 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी।
पाकिस्तान ने फिर दी चेतावनी

पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि किसी ने पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की तो “हम उन हाथों को काट देंगे।”
उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री कहते हैं कि पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं जाने देंगे। उन्होंने कहा कि जो पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर दावा करेंगे, उनके हाथ काट दिए जाएंगे।
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बाद में उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि के तहत अपने हिस्से के पानी की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और भारत को पाकिस्तान के लिए निर्धारित जल प्रवाह को बाधित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अताउल्लाह तरार ने क्या कहा
सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि सिंधु जल संधि कानूनी रूप से अब भी लागू है।
उन्होंने कहा कि भारत इसे एकतरफा स्थगित नहीं कर सकता, न रद्द कर सकता है और न ही इसमें बदलाव कर सकता है।
डॉन (Dawn) के मुताबिक, तरार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पाकिस्तान के अधिकार सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि पानी पाकिस्तान की जीवनरेखा है और यह उसकी रेड लाइन भी है।
इस्लामाबाद में होगा अंतरराष्ट्रीय सेमिनार
पाकिस्तानी मंत्रियों ने बताया कि मंगलवार को इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर पहला अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जाएगा।
सेमिनार में कानूनी विशेषज्ञ, जल विशेषज्ञ और विदेशी प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसमें संधि के कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
21 जून को रक्षा मंत्री ने भी दी थी चेतावनी
21 जून को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ARY News से बातचीत में कहा था कि यदि पाकिस्तान को लगा कि उसकी जल सुरक्षा खतरे में है तो वह भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह में दखल दे रहा है और रणनीतिक हथियार के रूप में इसका इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि पिछले एक वर्ष में इस मामले में क्या नए घटनाक्रम हुए हैं, इसकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं है।
भारत का रुख क्या है
अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था।
भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी।
खबरों में यह भी कहा गया है कि भारत ने सिंधु नदी का पूरा पानी नहीं रोका है। नदी और उसकी सहायक नदियों का जल प्रवाह आज भी पाकिस्तान की ओर जा रहा है।
बताया गया है कि भारत ने संधि के तहत दोनों देशों के बीच जल प्रवाह, बांधों, परियोजनाओं और जल प्रबंधन से जुड़े समन्वय एवं सूचना आदान-प्रदान की व्यवस्था पर रोक लगाई है।
सिंधु जल संधि क्या है
| विषय | जानकारी |
| संधि | सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) |
| हस्ताक्षर | 19 सितंबर 1960 |
| स्थान | कराची |
| मध्यस्थ | विश्व बैंक |
| हस्ताक्षरकर्ता | भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान |
सिंधु नदी प्रणाली में छह नदियां शामिल हैं—
- सिंधु
- झेलम
- चिनाब
- रावी
- ब्यास
- सतलुज
इन नदियों का बेसिन लगभग 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है।
- पाकिस्तान: 47%
- भारत: 39%
- चीन: 8%
- अफगानिस्तान: 6%
इन क्षेत्रों में लगभग 30 करोड़ लोग रहते हैं।
संधि का ऐतिहासिक घटनाक्रम
1947 के विभाजन के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हुआ।
1947 में दोनों देशों के इंजीनियरों के बीच स्टैंडस्टिल समझौता हुआ, जो 31 मार्च 1948 तक लागू रहा।
1 अप्रैल 1948 को समझौता समाप्त होने के बाद भारत ने दो प्रमुख नहरों का पानी रोक दिया, जिससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की लगभग 17 लाख एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई। बाद में दोनों देशों के बीच नया समझौता हुआ और भारत पानी देने पर सहमत हो गया।
इसके बाद 1951 से 1960 तक विश्व बैंक की मध्यस्थता में बातचीत चली और 19 सितंबर 1960 को सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए।
पाकिस्तान पर बताए गए संभावित प्रभाव
खबरों के अनुसार पाकिस्तान में लगभग 90% कृषि भूमि यानी 4.7 करोड़ एकड़ क्षेत्र की सिंचाई सिंधु नदी प्रणाली से होती है।
- कृषि क्षेत्र की राष्ट्रीय आय में हिस्सेदारी: 23%
- 68% ग्रामीण आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर
खबरों में यह भी कहा गया है कि मंगल और तारबेला हाइड्रोपावर बांधों को पानी नहीं मिलने से बिजली उत्पादन में 30% से 50% तक कमी आने की आशंका जताई गई है, जिससे औद्योगिक उत्पादन और रोजगार भी प्रभावित हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया पर भारत का रुख
खबरों में कहा गया है कि भारत ने हेग स्थित Court of Arbitration (CoA) के एकतरफा फैसले को स्वीकार नहीं किया। भारत ने Permanent Court of Arbitration (PCA) के उस दावे को भी खारिज किया कि वही इस मामले की सुनवाई करने में सक्षम है।
भारत का कहना है कि सिंधु जल संधि में विवादों के समाधान की प्रक्रिया क्रमवार तय की गई है और उसके प्रावधानों से अलग किसी भी प्रक्रिया का कानूनी आधार नहीं है।
खबर में मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के महानिदेशक सुजान चिनॉय के Firstpost में प्रकाशित लेख का भी उल्लेख किया गया है। लेख के अनुसार भारत ने संधि निलंबित करने से पहले विश्व बैंक से न्यूट्रल एक्सपर्ट नियुक्त करने का अनुरोध किया था, जबकि पाकिस्तान ने समानांतर कानूनी प्रक्रिया की मांग की थी।
अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का भी हुआ उल्लेख
खबर में यह भी उल्लेख किया गया है कि:
- 2016 में चीन ने दक्षिण चीन सागर पर UNCLOS के फैसले को स्वीकार नहीं किया।
- यूनाइटेड किंगडम ने चागोस द्वीप समूह से जुड़े अंतरराष्ट्रीय फैसले की अनदेखी की।
- 1985 में अमेरिका ने निकारागुआ विवाद में अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को नहीं माना।
वहीं, खबर में यह भी कहा गया है कि भारत ने 2014 में बंगाल की खाड़ी से जुड़े UNCLOS के फैसले को स्वीकार किया था।
विवाद के बीच आगे की दिशा
सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी जारी है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने कानूनी पक्ष को रखने की तैयारी कर रहा है और इस्लामाबाद में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित करने जा रहा है। दूसरी ओर भारत अपने पहले घोषित रुख पर कायम है कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई होने तक संधि बहाल नहीं की जाएगी। इसी कारण यह मुद्दा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और कानूनी चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
आध्यात्मिक दृष्टि से जल का महत्व
जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार भी माना जाता है। जब जल जैसे महत्वपूर्ण विषय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और विवाद का कारण बनते हैं, तब यह संदेश भी सामने आता है कि मानव समाज में न्याय, संयम, संवाद और शांति का महत्व बना रहना चाहिए।
तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज अपने आध्यात्मिक ज्ञान में बताते हैं कि मानव जीवन का वास्तविक कल्याण सत्य ज्ञान, आपसी सद्भाव और धर्मसम्मत आचरण से संभव है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण व्यक्ति को विवेकपूर्ण निर्णय, शांति और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
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FAQs on सिंधु जल संधि
1. सिंधु जल संधि कब हुई थी?
19 सितंबर 1960 को कराची में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में संधि पर हस्ताक्षर हुए।
2. सिंधु जल प्रणाली में कितनी नदियां शामिल हैं?
सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज सहित कुल छह नदियां शामिल हैं।
3. भारत ने सिंधु जल संधि क्यों निलंबित की?
अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि निलंबित करने की घोषणा की।
4. पाकिस्तान सिंधु जल संधि पर क्या कह रहा है?
पाकिस्तान का कहना है कि संधि कानूनी रूप से अब भी लागू है और भारत इसे एकतरफा समाप्त या संशोधित नहीं कर सकता।
5. इस्लामाबाद में होने वाले सेमिनार का उद्देश्य क्या है?
पाकिस्तान के अनुसार सेमिनार में सिंधु जल संधि के कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की जाएगी।

















