भारत, जो वैश्विक टेक कंपनियों के लिए सबसे बड़ा डेटा जनरेटर और बाज़ार है, अब युवाओं के डिजिटल स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सख्त कानून बनाने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के सांसद एल.एस.के. देवरायलु ने संसद में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया है, जिसमें 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है।
रॉयटर्स से बातचीत में उन्होंने चिंता जताई कि भारतीय बच्चे सोशल मीडिया की लत के शिकार हो रहे हैं और अनजाने में विदेशी कंपनियों के लिए मुफ्त डेटा जुटाने का काम कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल बड़ी टेक कंपनियां उन्नत एआई सिस्टम बनाने में कर रही हैं, जबकि भारतीय यूज़र्स को इसका कोई सीधा फायदा नहीं मिल रहा।
भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन की तैयारी से संबंधित मुख्य बिंदु :
- 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट गैर-कानूनी होगा।
- उम्र सत्यापन की पुरी ज़िम्मेदारी मेटा, गूगल, एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स की होगी।
- नियम तोड़ने पर अकाउंट तुरंत डिसेबल होंगे।
- बच्चों के डेटा से विदेशी टेक कंपनियां उन्नत एआई सिस्टम बनाने में कर रही हैं, जबकि भारतीय यूज़र्स को इसका कोई सीधा फायदा नहीं मिल रहा।
- ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों के फैसलों से प्रेरणा मिली।
- मेटा का समर्थन, लेकिन सख्त प्रतिबंधों पर चेतावनी ।
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नए सोशल मीडिया विधेयक में सख्त प्रावधान, 16 साल से कम उम्र पर पूरी रोक
15 पन्नों के इस प्रस्तावित सोशल मीडिया विधेयक में साफ तौर पर कहा गया है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाना या रखना गैर-कानूनी होगा। यदि कोई बच्चा अकाउंट बनाने की कोशिश करता है, तो उसकी उम्र की जांच की पूरी ज़िम्मेदारी मेटा, गूगल और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की होगी। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में ऐसे अकाउंट्स को तुरंत डिसेबल करना अनिवार्य होगा। विधेयक में यह भी चिंता जताई गई है कि भारतीयों के डेटा का इस्तेमाल विदेशी एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित करने में किया जा रहा है, जिस पर सख्त नियंत्रण और कड़े प्रतिबंध लगाने की जरूरत बताई गई है।
बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर भारत का रुख, वैश्विक बहस और तेज
ऑस्ट्रेलिया (16 वर्ष) और फ्रांस (15 वर्ष) में हाल ही में लगाए गए प्रतिबंधों के बाद भारत का यह रुख दुनिया भर में चल रही इस बहस को और तेज़ कर रहा है। भारत में इस समय करीब 75 करोड़ स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं, लेकिन बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर कोई प्रभावी न्यूनतम उम्र सीमा लागू नहीं है। इसी बीच ब्रिटेन, डेनमार्क और ग्रीस जैसे देशों में भी ऐसी नीतियों पर अध्ययन और विचार किया जा रहा है।

टेक दिग्गजों की चुप्पी और संभावित विरोध
मेटा ने कहा है कि वह पैरेंटल ओवरसाइट का समर्थन करता है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि बहुत सख्त प्रतिबंध बच्चों को असुरक्षित और बिना नियंत्रण वाले प्लेटफॉर्म्स की ओर धकेल सकते हैं। वहीं गूगल (यूट्यूब) और एक्स की ओर से इस मुद्दे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन की तैयारी से संबंधित मुख्य FAQs
Q1. यह विधेयक किसने पेश किया है?
TDP सांसद एल.एस.के. देवरायलु ने प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में पेश किया है।
Q2. किस उम्र तक सोशल मीडिया पर रोक होगी?
16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर।
Q3. उम्र की जांच कौन करेगा?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे मेटा, गूगल और एक्स।
Q4. नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई होगी?
संबंधित अकाउंट को तुरंत डिसेबल किया जाएगा।
Q5. इस कानून की जरूरत क्यों बताई जा रही है?
बच्चों की डिजिटल लत, डेटा सुरक्षा और विदेशी एआई कंपनियों के डेटा उपयोग को लेकर।
















