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अमेरिका-ईरान समझौता लागू: 14 बिंदुओं वाले MoU पर हस्ताक्षर, होर्मुज़ स्ट्रेट खुलेगा; ट्रंप ने चीन-रूस की तटस्थता की सराहना की

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अमेरिका-ईरान समझौता लागू, जानिए 14 अहम बिंदु

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम बढ़ाने के समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और यह लागू भी हो गया है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि बीबीसी से की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान 14 बिंदुओं वाले मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए। समझौते में होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने, ईरान के परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता, 300 अरब डॉलर के आर्थिक विकास फंड और 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।

Contents

अमेरिका-ईरान समझौता: प्रमुख बातें

मुख्य बिंदु

  • अमेरिका और ईरान के बीच 14 बिंदुओं वाले MoU पर हस्ताक्षर हुए।
  • व्हाइट हाउस के अनुसार समझौता लागू हो चुका है।
  • ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
  • पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर का फंड प्रस्तावित।
  • अमेरिका का योगदान अनिवार्य नहीं होगा।
  • होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू होगी।
  • 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत पूरी करने का लक्ष्य।
  • अमेरिका नौसैनिक नाकाबंदी हटाना शुरू करेगा।
  • ईरान की फ्रीज़ की गई संपत्तियों को उपलब्ध कराने का प्रावधान।
  • ट्रंप ने चीन और रूस की तटस्थता की सराहना की।
  • मिनाब स्थित लड़कियों के स्कूल पर हमले की जांच अंतिम चरण में बताई गई।

G-7 सम्मेलन के दौरान हुआ समझौते पर हस्ताक्षर

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व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में G-7 सम्मेलन के बाद आयोजित रात्रिभोज के दौरान इस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए। व्हाइट हाउस के अनुसार ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भी इस पर साइन किए हैं।

इससे पहले ट्रंप और ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया था कि सप्ताह के अंत में जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर समारोह होगा। हालांकि अब यह होगा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।

14 बिंदुओं वाले MoU में क्या-क्या शामिल है

समझौते के अनुसार ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। इसके साथ ही देश के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर का फंड बनाया जाएगा। हालांकि अमेरिका के लिए इसमें योगदान देना अनिवार्य नहीं होगा।

ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को “परफॉर्मेंस बेस्ड” यानी प्रदर्शन आधारित बताया है। इसका अर्थ है कि ईरान को तभी लाभ मिलेगा, जब वह अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा।

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समझौते के कई हिस्सों में अभी भी कई सवालों के जवाब नहीं हैं और कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं।

सैन्य अभियान समाप्त करने और लेबनान को शामिल करने का प्रावधान

समझौते के पहले पैराग्राफ में कहा गया है कि अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी “हर मोर्चे” पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा करेंगे। इसमें लेबनान भी शामिल है।

अमेरिका के दृष्टिकोण से ट्रंप लगातार इस बात को लेकर चिंतित थे कि हिज़्बुल्लाह के खिलाफ इसराइल की सैन्य कार्रवाई ईरान के साथ हुए समझौते को प्रभावित कर सकती है।

दूसरी ओर, ईरान कई बार कह चुका है कि युद्धविराम में लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बुधवार को कहा कि यदि इसराइल लेबनान में सैन्य अभियान जारी रखता है तो यह समझौते का उल्लंघन होगा और ऐसी स्थिति में “ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे”।

समझौते में यह भी कहा गया है कि अब कोई भी पक्ष सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं करेगा, एक-दूसरे को धमकी नहीं देगा तथा लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करेगा।

संप्रभुता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने पर सहमति

अमेरिकी अधिकारियों ने पत्रकारों को फोन कॉल के दौरान दस्तावेज़ को पढ़कर सुनाया। उसमें कहा गया है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे तथा एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

दस्तावेज़ के तीसरे बिंदु के अनुसार दोनों देश अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत पूरी करने का प्रयास करेंगे। यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो समयसीमा बढ़ाई भी जा सकती है।

दोनों नेताओं के MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद 60 दिनों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।

होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने और अमेरिकी नाकाबंदी हटाने की योजना

चौथे बिंदु के अनुसार MoU पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना शुरू करेगा। साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए किसी भी प्रकार के व्यवधान या बाधाओं को हटाएगा।

समझौते और ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार 30 दिनों के भीतर नाकाबंदी पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी।

अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से गुजरने वाले जहाजों की संख्या उसी अनुपात में बढ़ाएगा, जिस अनुपात में ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट में यातायात बहाल करेगा।

अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के 30 दिनों के भीतर अमेरिका ने ईरान के आसपास के क्षेत्रों से अपनी सेना हटाने का भी वादा किया है। व्यवहार में इसका अर्थ यह होगा कि अमेरिकी सेना उसी स्थिति और संसाधनों पर लौट जाएगी, जो 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले थे।

होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर नहीं लगेगा कोई शुल्क

समझौते में कहा गया है कि MoU पर हस्ताक्षर होते ही ईरान अपनी पूरी कोशिश करेगा कि होर्मुज़ स्ट्रेट से व्यापारिक जहाज सुरक्षित रूप से गुजर सकें और इसके लिए कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा।

दस्तावेज़ के अनुसार तकनीकी और सैन्य बाधाओं को हटाने तथा बारूदी सुरंगें साफ करने की प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू होगी।

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लंबी अवधि में ईरान, ओमान और अन्य खाड़ी देशों के साथ मिलकर होर्मुज़ स्ट्रेट के प्रबंधन के लिए एक व्यापक समझौता तैयार करेगा।

समझौते से जुड़े प्रमुख समयबद्ध प्रावधान

प्रावधानसमयसीमा
अंतिम समझौते पर बातचीत60 दिन
नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त30 दिन
अमेरिकी सेना की वापसीअंतिम समझौते के 30 दिन भीतर
होर्मुज़ यातायात बहालीतुरंत शुरू

ईरान के फ्रीज़ हुए खातों पर क्या प्रावधान है

दस्तावेज़ के 11वें बिंदु में कहा गया है कि MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद अमेरिका “फ्रीज़ या प्रतिबंधित फंड पूरी तरह उपलब्ध कराने” का वादा करता है।

इसकी प्रक्रिया आगे की बातचीत में तय की जाएगी।

बुधवार को एक अमेरिकी अधिकारी ने पत्रकारों से कहा कि MoU के बाद की वार्ताओं के दौरान कुछ संपत्तियां जारी की जाएंगी। ऐसा तब किया जाएगा जब ईरान समझौते की शर्तों का पालन करेगा, जैसे कि अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के मुद्दे पर कार्रवाई शुरू करना।

ट्रंप ने चीन और रूस की तटस्थता के लिए जताया आभार

फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तटस्थता की सराहना की।

उन्होंने कहा कि इन दोनों नेताओं ने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर रोक लगाने के अमेरिकी प्रयासों में कोई बाधा नहीं डाली।

ट्रंप के अनुसार शी जिनपिंग ने संघर्ष को सुलझाने में सहयोग किया। उन्होंने कहा कि चीन ने ईरान को बड़े हथियार या कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइलें नहीं भेजीं। साथ ही चीन ने अपने तेल जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भी नहीं भेजे।

मिनाब स्कूल हमले की जांच अंतिम चरण में

ट्रंप ने ईरान के मिनाब में लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले को जानबूझकर नहीं किया गया हमला बताया। उनके अनुसार युद्ध के दौरान ऐसी गलतियां हो सकती हैं।

यह घटना 28 फरवरी को संघर्ष के पहले दिन हुई थी। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में 175 से अधिक बच्चों और शिक्षकों की मौत हुई थी।

शुरुआत में ट्रंप ने बिना किसी सबूत के दावा किया था कि इस हमले के पीछे ईरान का हाथ है। बाद में उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने पहले बताया था कि अमेरिकी सेना की शुरुआती आंतरिक जांच में इस घातक हमले के पीछे अमेरिकी बलों के होने के संकेत मिले थे। हालांकि पेंटागन ने अभी किसी नतीजे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख के अनुसार यह जांच जटिल रही क्योंकि स्कूल एक सक्रिय ईरानी क्रूज मिसाइल बेस के भीतर स्थित था। उन्होंने बताया कि जांच अब अंतिम चरण में पहुंच रही है।

अंतिम समझौते की दिशा में आगे की प्रक्रिया

दस्तावेज़ के अंतिम बिंदुओं में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान MoU के पालन और भविष्य के अंतिम समझौते की निगरानी के लिए एक व्यवस्था बनाएंगे। हालांकि व्यवहार में यह व्यवस्था कैसी होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

इसके बाद दोनों देश अंतिम समझौते के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करेंगे। MoU में यह भी कहा गया है कि अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी।

विश्व शांति का आध्यात्मिक मार्ग

अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और युद्धविराम से जुड़ी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि स्थायी शांति केवल राजनीतिक समझौतों से ही नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, आपसी सम्मान और आध्यात्मिक जागरूकता से भी मजबूत होती है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण में दया, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण को महत्वपूर्ण माना जाता है, जो संघर्षों को कम करने की दिशा में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं।

तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी मानते हैं कि उनके आध्यात्मिक संदेश मानव समाज को शांति, भाईचारे और नैतिक जीवन की ओर प्रेरित करते हैं। इसी संदर्भ में वे “कलयुग में सतयुग की शुरुआत” जैसे संदेशों के माध्यम से सामाजिक सुधार और वैश्विक सद्भाव का विचार प्रस्तुत करते हैं। अधिक जानकारी के लिए “कलयुग में सतयुग की शुरुआत – भाग 6” देखा जा सकता है।

अधिक जानकारी के लिए:

Website: www.jagatgururampalji.org
YouTube: Sant Rampal Ji Maharaj
Facebook: Spiritual Leader Saint Rampal Ji
X (Twitter): @SaintRampalJiM

FAQs on अमेरिका-ईरान समझौता

1. अमेरिका-ईरान समझौते में कितने बिंदु शामिल हैं?

समझौता 14 बिंदुओं वाले मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर आधारित है।

2. क्या ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता दी है?

हाँ, दस्तावेज़ के अनुसार ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने की प्रतिबद्धता जताई है।

3. होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर समझौते में क्या प्रावधान है?

व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने और कोई शुल्क न लेने का प्रावधान है।

4. ईरान की फ्रीज़ संपत्तियों को लेकर क्या कहा गया है?

अमेरिका ने फ्रीज़ या प्रतिबंधित फंड उपलब्ध कराने का वादा किया है, जिसकी प्रक्रिया बातचीत में तय होगी।

5. मिनाब स्कूल हमले की जांच की स्थिति क्या है?

पेंटागन ने कोई अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया है और जांच अंतिम चरण में बताई गई है।

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