आधुनिक डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हर क्षेत्र में क्रांति ला दी है, लेकिन न्यायपालिका जैसे अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र में इसकी भूमिका पर एक गंभीर बहस छिड़ गई है। हाल ही में भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए यह स्पष्ट किया है कि न्यायिक निर्णयों, दलीलों या शोध में AI द्वारा उत्पन्न ‘हैलुसिनेटेड’ (नकली या भ्रामक) साक्ष्यों और केस कानूनों का सहारा लेना न्याय की पवित्रता के लिए घातक है। कोर्ट ने इसे ‘कानून के शासन’ (Rule of Law) को कमजोर करने वाला एक खतरनाक कदम बताते हुए इसे पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया है।
न्यायिक प्रक्रिया में AI के तकनीकी जोखिम: ‘हैलुसिनेशन’ क्या है?
AI मॉडल, विशेष रूप से लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs), अक्सर ऐसी जानकारी उत्पन्न करते हैं जो तथ्यात्मक रूप से गलत होती है लेकिन दिखने में एकदम सटीक लगती है। इसे तकनीकी भाषा में ‘हैलुसिनेशन’ कहा जाता है। कानूनी संदर्भ में, इसका अर्थ है:
- काल्पनिक केस कानून: AI ऐसे अदालती फैसलों का हवाला दे सकता है जो अस्तित्व में ही नहीं हैं।
- विकृत कानूनी तर्क: यह जटिल कानूनी सिद्धांतों को गलत तरीके से जोड़कर पेश कर सकता है, जिससे न्याय की पूरी दिशा बदल सकती है।
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न्यायिक प्रक्रिया में तकनीकी हस्तक्षेप की सीमाएँ
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि तकनीक का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया की कार्यक्षमता को बढ़ाना हो सकता है, न कि न्यायाधीश के मानवीय विवेक (Human Discretion) को प्रतिस्थापित करना।
- मानवीय निरीक्षण अनिवार्य: AI केवल एक सहायक उपकरण (Tool) के रूप में कार्य कर सकता है। अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी और विवेक सदैव एक मनुष्य (अधिकारी या न्यायाधीश) की ही होगी।
- सत्यापन की प्रक्रिया: यदि वकील या न्यायाधीश किसी भी AI टूल का उपयोग करते हैं, तो उनसे प्राप्त किसी भी उद्धरण (Citation) या तथ्य का मूल कानूनी डेटाबेस के साथ स्वतंत्र सत्यापन अनिवार्य है।
- जवाबदेही का सिद्धांत: यदि AI की गलत जानकारी के कारण अदालत को गुमराह किया जाता है, तो इसके लिए संबंधित वकील या पक्ष को उत्तरदायी ठहराया जाएगा। कोई भी ‘तकनीकी दोष’ का बहाना बनाकर अपनी पेशेवर जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य: दुनिया भर में बढ़ती चिंता
सिर्फ भारत ही नहीं, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में भी AI के कारण वकीलों पर जुर्माना लगाया गया है। कई अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों ने अब AI के उपयोग के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें स्पष्ट कहा गया है कि AI द्वारा तैयार किए गए किसी भी दस्तावेज को अदालत में पेश करने से पहले वकील को यह प्रमाणित करना होगा कि उन्होंने हर तथ्य की व्यक्तिगत रूप से जाँच की है।
प्रमुख चुनौतियाँ और समाधान
| चुनौती | संभावित जोखिम | अनुशंसित समाधान |
| AI हैलुसिनेशन | काल्पनिक केस कानूनों का हवाला | अनिवार्य क्रॉस-वेरिफिकेशन (मूल स्रोतों से) |
| डेटा गोपनीयता | मुवक्किल की गोपनीय जानकारी का रिसाव | निजी और एन्क्रिप्टेड कानूनी AI टूल का उपयोग |
| मानवीय कमी | फैसलों में संवेदना और नैतिकता का अभाव | निर्णय प्रक्रिया में हमेशा मानवीय विवेक का समावेश |
| पूर्वाग्रह (Bias) | AI डेटा में निहित सामाजिक भेदभाव | एल्गोरिदम की पारदर्शिता और ऑडिटिंग |
परमात्मा का संविधान और उसकी सटीक व्याख्या
परमात्मा का संविधान ही सर्वोपरि है, जिसके आगे संसार का कोई भी कानून टिक नहीं सकता। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि संत गरीबदास जी महाराज द्वारा रचित ‘सतग्रंथ साहिब’ ही वास्तव में परमात्मा का संविधान है, जो पूर्ण ज्ञान का भंडार है। संत रामपाल जी महाराज अपने सत्संगों के माध्यम से इस ग्रंथ की व्याख्या करते हैं और आत्मा के कल्याण का मार्ग दिखाते हैं। इसी मार्ग पर चलते हुए, वे ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ भी चला रहे हैं, जिसके तहत जरूरतमंदों को निशुल्क भोजन और आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि समाज का कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए। संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक ज्ञान गंगा पुस्तक निशुल्क मँगवाने के लिए लिंक पर क्लिक करें ।
कानूनी प्रक्रियाओं में AI के उपयोग पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या सुप्रीम कोर्ट ने AI के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है?
Ans: नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन बिना सत्यापन के AI-जनित सामग्री का उपयोग करने पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है।
2. ‘AI हैलुसिनेशन’ का क्या अर्थ है?
Ans: इसका अर्थ है कि AI द्वारा आत्मविश्वास के साथ दी गई गलत, काल्पनिक या असत्य जानकारी, जिसे वह सच बताकर पेश करता है।
3. न्यायपालिका में AI का सही उपयोग क्या है?
Ans: AI का उपयोग केवल प्रशासनिक कार्यों, जैसे केस मैनेजमेंट, अनुवाद (SUVAAS), और कानूनी शोध में सहायक के रूप में किया जाना चाहिए।
4. क्या कोई अधिकारी AI की गलती के लिए जिम्मेदार होगा?
Ans: जी हाँ, सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, निर्णय के लिए उत्तरदायित्व पूरी तरह से उस मानव अधिकारी का होगा जिसने AI की मदद ली है।

















