उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने मौजूदा बिजली दरों को यथावत रखते हुए उपभोक्ताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों पर पावर कॉरपोरेशन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता, 1912 शिकायत निवारण प्रणाली, विद्युत वितरण की वर्टिकल व्यवस्था, ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं की समस्याओं और मानव संसाधन मानकों के पालन जैसे विषयों पर जवाब मांगा है। आयोग ने समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश देते हुए आदेशों का पालन नहीं होने पर विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 142 के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
यूपी में विद्युत नियामक आयोग की कार्रवाई: प्रमुख बातें
- मौजूदा बिजली दरें यथावत रखी गईं।
- पावर कॉरपोरेशन से उपभोक्ताओं से जुड़े कई मामलों पर रिपोर्ट तलब।
- लगभग 90 लाख स्मार्ट मीटरों में से 5 प्रतिशत चेक मीटरों की जांच और गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट मांगी गई।
- प्रत्येक जिले की अलग-अलग स्मार्ट मीटर गुणवत्ता एवं एक्यूरेसी टेस्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश।
- 1912 शिकायत निवारण प्रणाली पर लंबित रिपोर्ट तत्काल देने का आदेश।
- ग्रामीण क्षेत्रों के 35-40 लाख घरेलू उपभोक्ताओं से जुड़े प्रस्ताव पर तीन माह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई।
- विद्युत वितरण की वर्टिकल व्यवस्था का स्वतंत्र एजेंसी से मूल्यांकन कराने के निर्देश।
- वर्ष 2019 में निर्धारित मानव संसाधन मानकों के पालन और पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया।
- आदेशों का पालन नहीं होने पर विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 142 के तहत कार्रवाई की चेतावनी।
बिजली दरें यथावत, लेकिन उपभोक्ता हितों से जुड़े मामलों पर आयोग सख्त
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने मौजूदा बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसके साथ ही आयोग ने उपभोक्ताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से जवाब-तलब किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए विभिन्न मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता जांच पर आयोग ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बीच आयोग ने उनकी गुणवत्ता पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। टैरिफ प्रस्ताव पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद तथा कई सामान्य उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
प्रदेश में लगभग 90 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 5 प्रतिशत पुराने मीटरों को चेक मीटर के रूप में बनाए रखने के निर्देश पहले दिए गए थे। अब आयोग ने सभी बिजली कंपनियों को इन चेक मीटरों की जांच एवं गुणवत्ता परीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
साथ ही आयोग ने प्रत्येक जिले के आधार पर स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता और एक्यूरेसी टेस्ट की अलग-अलग रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि उनकी कार्यप्रणाली का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके।
प्रीपेड से पोस्टपेड होने के बाद भी शिकायतें बरकरार
स्मार्ट मीटरों के तेज चलने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। प्रीपेड मीटर व्यवस्था के दौरान इन शिकायतों में अधिक वृद्धि हुई थी। बाद में इन्हीं मीटरों को पोस्टपेड कर दिया गया, लेकिन शिकायतें अब भी जारी हैं। ऐसे में आयोग द्वारा गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि आयोग के इन आदेशों से उपभोक्ता हितों का संरक्षण होगा।
1912 शिकायत निवारण प्रणाली पर आयोग की नाराजगी
आयोग ने टोल फ्री नंबर 1912 पर आने वाली उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था पर भी गंभीर नाराजगी जताई है।
आयोग ने कहा कि शिकायतों के पारदर्शी एवं प्रभावी निस्तारण की व्यवस्था पर तीन माह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन अब तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। आयोग के अनुसार, 1912 पर शिकायतों के फर्जी या केवल कागजी निस्तारण की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।
आयोग ने तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए चेतावनी दी है कि आदेशों का पालन नहीं होने पर विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 142 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं की छोटी दुकानों का मामला भी उठा
टैरिफ सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों के उन घरेलू उपभोक्ताओं का मुद्दा उठाया, जो अपने घरों में आजीविका के लिए छोटी दुकान संचालित करते हैं।
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परिषद के अनुसार, प्रदेश के लगभग 35 से 40 लाख उपभोक्ता इससे प्रभावित हो सकते हैं। वर्तमान व्यवस्था में ऐसे उपभोक्ताओं को दुकान के लिए घरेलू बिजली उपयोग करने की अनुमति नहीं है, जिसके कारण कई मामलों में बिजली चोरी जैसी धाराओं में कार्रवाई भी हो जाती है।
आयोग ने इस मामले में पावर कॉरपोरेशन को तीन माह के भीतर विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि पहले भी प्रस्ताव मांगा गया था, लेकिन कॉरपोरेशन ने कोई प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया था।
वर्टिकल व्यवस्था का होगा स्वतंत्र मूल्यांकन
उपभोक्ता परिषद ने बिजली कंपनियों की वर्टिकल व्यवस्था के प्रभावी संचालन और संविदा कर्मचारियों की छंटनी का मुद्दा भी उठाया।
आयोग ने राजधानी लखनऊ सहित कई शहरों में लागू विद्युत वितरण की वर्टिकल व्यवस्था का किसी स्वतंत्र और पेशेवर एजेंसी से मूल्यांकन कराने का आदेश दिया है।
साथ ही आयोग ने निर्देश दिया कि विद्युत उपकेंद्रों एवं फीडर स्तर तक रखरखाव के लिए पर्याप्त नियमित एवं संविदा कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
वर्ष 2019 के मानव संसाधन मानकों का पालन करने के निर्देश
बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को हटाए जाने का विरोध कर्मचारी, अभियंता एवं उपभोक्ता संगठनों द्वारा उठाए जाने के बाद आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वर्ष 2019 में निर्धारित मानव संसाधन मानकों का पूर्ण पालन किया जाए।
आयोग ने कहा कि प्रत्येक फीडर स्तर पर आवश्यक संख्या में कर्मचारी उपलब्ध कराए जाएं, ताकि विद्युत व्यवस्था अधिक विश्वसनीय, जवाबदेह और उपभोक्ता हितैषी बन सके।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया दरें स्थिर रहने का कारण
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने लगातार सातवें वर्ष बिजली दरें यथावत रहने का प्रमुख कारण ऊर्जा क्षेत्र में कुशल प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन को बताया।
उनका कहना है कि बेहतर वित्तीय प्रबंधन के कारण उपभोक्ताओं पर महंगी बिजली का अतिरिक्त बोझ डालने की आवश्यकता नहीं पड़ी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश के अग्रणी ऊर्जा राज्यों में शामिल है और बिजली उत्पादन, आपूर्ति, वितरण सुधार तथा उपभोक्ता सेवाओं के क्षेत्र में लगातार कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
प्रमुख निर्देश एक नजर में
| विषय | आयोग का निर्देश |
| बिजली दरें | यथावत रखी गईं |
| स्मार्ट मीटर | 5% चेक मीटरों की जांच व गुणवत्ता रिपोर्ट |
| जिला स्तर रिपोर्ट | प्रत्येक जिले की अलग गुणवत्ता एवं एक्यूरेसी रिपोर्ट |
| 1912 शिकायत प्रणाली | तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश |
| ग्रामीण घरेलू उपभोक्ता | तीन माह में विस्तृत प्रस्ताव |
| वर्टिकल व्यवस्था | स्वतंत्र एजेंसी से मूल्यांकन |
| मानव संसाधन | वर्ष 2019 के मानकों का पालन |
| कार्रवाई | धारा 142 के तहत चेतावनी |
उपभोक्ता हितों पर आयोग का विशेष फोकस
विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ आदेश के साथ यह स्पष्ट किया है कि बिजली दरों को यथावत रखने के साथ-साथ उपभोक्ताओं की शिकायतों, स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता, शिकायत निवारण प्रणाली, ग्रामीण उपभोक्ताओं की समस्याओं और विद्युत वितरण व्यवस्था में सुधार पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाएगा। आयोग ने संबंधित मामलों में समयबद्ध रिपोर्ट और प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से जीवन का मार्ग
हिंदू धर्म के पवित्र शास्त्रों के अनुसार जब व्यक्ति किसी तत्वदर्शी संत की शरण में रहकर ईश्वर की भक्ति करता है, तो उसके भीतर सत्य, ईमानदारी, नैतिकता और अपने कर्तव्यों के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है। इससे वह गलत कार्यों से बचने का प्रयास करता है और अपने प्रत्येक दायित्व का निर्वहन निष्पक्षता से करने की प्रेरणा प्राप्त करता है।
संत रामपाल जी महाराज वर्तमान समय में शास्त्रानुकूल भक्ति का मार्ग बता रहे हैं, जिसके माध्यम से पूर्ण परमात्मा की भक्ति करने का संदेश दिया जा रहा है।
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज अपने सत्संग में बताते हैं कि आज का मनुष्य भौतिक लालसा में उलझकर परमात्मा की भक्ति से दूर होता जा रहा है। इसलिए जीवन को सार्थक बनाने के लिए नियमित सत्संग सुनना, शास्त्रानुकूल भक्ति करना और परमात्मा की प्राप्ति का प्रयास करना आवश्यक है।
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FAQs on यूपी में विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं से जुड़े मामलों में पावर कॉरपोरेशन से तलब की रिपोर्ट
1. यूपी विद्युत नियामक आयोग ने किन मामलों में रिपोर्ट मांगी है?
स्मार्ट मीटर, 1912 शिकायत प्रणाली, वर्टिकल व्यवस्था, ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं और मानव संसाधन मानकों से जुड़े मामलों में।
2. स्मार्ट मीटरों को लेकर आयोग ने क्या निर्देश दिए हैं?
लगभग 90 लाख स्मार्ट मीटरों में से 5 प्रतिशत चेक मीटरों की जांच और गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट मांगी गई है।
3. 1912 शिकायत प्रणाली पर आयोग ने क्या कहा?
आयोग ने लंबित रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने को कहा और पालन न होने पर धारा 142 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी।
4. ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं के लिए क्या प्रस्ताव मांगा गया है?
घर से छोटी दुकान चलाने वाले उपभोक्ताओं से जुड़े मामले पर पावर कॉरपोरेशन को तीन माह में विस्तृत प्रस्ताव देने का निर्देश दिया गया है।
5. बिजली दरें क्यों नहीं बढ़ाई गईं?
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के अनुसार, कुशल प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन के कारण लगातार सातवें वर्ष बिजली दरें यथावत रखी गई हैं।

















